मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत के समय मंत्रिपरिषद में 51 से 70 वर्ष आयु वर्ग के मंत्रियों की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत से अधिक थी, जबकि 31 से 50 वर्ष आयु वर्ग के मंत्रियों की संख्या करीब 24 प्रतिशत बताई गई थी। ऐसे में संभावित फेरबदल में युवा नेताओं को मौका मिलने की संभावना पर चर्चा हो रही है।
12 पद खाली, नए चेहरों की एंट्री संभव
हाल में तीन मंत्रियों के इस्तीफे के बाद मंत्रिपरिषद में खाली पदों की संख्या बढ़ गई है। वर्तमान में प्रधानमंत्री समेत मंत्रिपरिषद में 69 सदस्य हैं, जबकि संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के तहत अधिकतम 81 सदस्य हो सकते हैं। इस लिहाज से 12 पदों पर नए सदस्यों को शामिल किया जा सकता है।
हालांकि, फेरबदल केवल खाली पद भरने तक सीमित नहीं रहेगा। चर्चा है कि कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है, जबकि कुछ नए चेहरों को सरकार में शामिल करने का मौका मिल सकता है।
कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदल सकती हैं
राजनीतिक और संगठनात्मक जिम्मेदारियां मिलने के बाद कुछ मंत्रियों की केंद्रीय मंत्रिपरिषद से भूमिका बदलने की संभावना भी जताई जा रही है। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और यूपी भाजपा के अध्यक्ष बनाए गए पंकज चौधरी के अलावा कुछ अन्य नेताओं की जिम्मेदारियों को लेकर भी चर्चा है।
वहीं, कई मंत्रियों के पास एक से अधिक मंत्रालयों का प्रभार है। संभावित फेरबदल में इन विभागों का पुनर्वितरण कर कुछ मंत्रियों का कार्यभार कम किया जा सकता है।
यूपी, MP समेत इन राज्यों से आ सकते हैं नए चेहरे
सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, संभावित कैबिनेट विस्तार में उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र से युवा नेताओं को शामिल किया जा सकता है। आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों पर भी विचार किया जा सकता है।
सहयोगी दलों को भी मिल सकती है जगह
मंत्रिपरिषद में फेरबदल के दौरान एनडीए के सहयोगी दलों को भी अधिक प्रतिनिधित्व देने पर विचार हो सकता है। शिवसेना की ओर से कैबिनेट में प्रतिनिधित्व बढ़ने की अटकलें हैं और श्रीकांत शिंदे के नाम की भी चर्चा चल रही है।
फिलहाल कैबिनेट फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में किसे मंत्रिपरिषद से बाहर किया जाएगा और किन नए चेहरों को मौका मिलेगा, इस पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री और भाजपा नेतृत्व के स्तर पर ही होगा। संभावित बदलाव में युवा, महिला, क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरण अहम भूमिका निभा सकते हैं।