17 समूहों की दीदियां और 17 पशुपालक गए थे गुजरात
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों से कबीरधाम जिले के 17 बिहान स्व-सहायता समूहों की दीदियों और 17 पशुपालकों को बनासकाठा के शैक्षणिक भ्रमण पर भेजा गया था। इस दौरान दल ने डेयरी कोऑपरेटिव और अमूल डेयरी कोऑपरेटिव की कार्यप्रणाली को करीब से समझा।
प्रतिभागियों ने उन्नत पशुपालन तकनीक, संतुलित पशु आहार, चारा प्रबंधन, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के तरीके, दूध संकलन और प्रसंस्करण की आधुनिक व्यवस्था के बारे में जानकारी हासिल की।
अमूल के सहकारी मॉडल को समझा
भ्रमण के दौरान महिलाओं और पशुपालकों ने दूध की गुणवत्ता जांच, डेयरी उत्पादों के निर्माण और उनके बाजार तक पहुंचने की प्रक्रिया का भी अवलोकन किया। इसके साथ ही छोटे पशुपालकों को सहकारी मॉडल के जरिए संगठित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की व्यवस्था को समझा।
गुजरात से लौटीं महिलाओं ने बताया कि वहां पशुपालन और डेयरी को सिर्फ व्यक्तिगत आय का जरिया नहीं, बल्कि सामूहिक आर्थिक विकास के मॉडल के रूप में विकसित किया गया है।
गांवों में लागू करेंगे गुजरात की सीख
बिहान समूह की दीदियों ने बताया कि गुजरात में मिली सीख से उन्हें अपने गांवों में पशुपालन और डेयरी गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित करने की प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि वहां सीखी गई उपयोगी तकनीकों और प्रबंधन के तरीकों को अन्य ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों के साथ साझा किया जाएगा।
महिलाओं का उद्देश्य इन अनुभवों के आधार पर गांवों में आजीविका के नए अवसर विकसित करना और पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में काम करना है।
विजय शर्मा ने कहा- सीख को जमीन पर उतारना जरूरी
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने महिलाओं और पशुपालकों से उनके अनुभव सुने। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक भ्रमण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब वहां से मिली सीख को अपने गांव और जिले में लागू किया जाए।
उन्होंने बनासकाठा में देखी गई उन्नत डेयरी व्यवस्था, पशुपालन तकनीक, चारा प्रबंधन, दुग्ध संकलन, गुणवत्ता नियंत्रण और सहकारी मॉडल को कबीरधाम में अपनाने का आह्वान किया।
ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। बिहान स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि गुजरात के सफल डेयरी मॉडल से मिले अनुभव कबीरधाम में दुग्ध उत्पादन, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।