मरीज के हृदय की पंपिंग क्षमता भी करीब 40 प्रतिशत रह गई थी। इसके अलावा अस्पताल पहुंचने के समय उनका ब्लड शुगर 500 mg/dL से अधिक था, जिसके चलते सर्जरी से पहले शुगर को नियंत्रित करना चिकित्सकीय टीम के लिए बड़ी चुनौती थी।
पहले नियंत्रित किया गया ब्लड शुगर
डॉक्टरों के मुताबिक, अत्यधिक बढ़े हुए ब्लड शुगर की स्थिति में तत्काल बाईपास सर्जरी करना जोखिमपूर्ण हो सकता था। इसलिए डॉक्टरों ने पहले मरीज के ब्लड शुगर को नियंत्रित किया और उनकी स्थिति को सर्जरी के लिए अनुकूल बनाया। इसके बाद उनकी बाईपास सर्जरी की गई।
विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम ने मरीज की बीटिंग हार्ट कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (Beating Heart CABG) सफलतापूर्वक की।
बिना हृदय को रोके की गई सर्जरी
सर्जरी के दौरान बाईपास के लिए मैमरी आर्टरी (Mammary Artery) का इस्तेमाल किया गया। चिकित्सकीय तौर पर आर्टेरियल ग्राफ्ट को लंबे समय तक प्रभावी रहने वाला ग्राफ्ट माना जाता है।
मरीज की सर्जरी मिडलाइन स्टर्नोटोमी तकनीक से की गई। इस प्रक्रिया में सीने की मध्य हड्डी यानी स्टर्नम को सावधानीपूर्वक खोलकर हृदय तक पहुंच बनाई जाती है। कोरोनरी बाईपास सर्जरी में यह एक स्थापित और विश्वसनीय ऑपरेटिव तकनीक है।
ऑपरेशन के दूसरे दिन से चलने लगी मरीज
सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी भी अच्छी रही। ऑपरेशन के दिन ही उन्हें होश आ गया और शाम को उन्होंने हल्का नाश्ता किया। इसके बाद ऑपरेशन के दूसरे दिन से ही मरीज ने चलना-फिरना शुरू कर दिया।
अस्पताल के अनुसार, अब मरीज की स्थिति अच्छी है और उन्हें डिस्चार्ज किया जा रहा है।
मधुबनी से दरभंगा और फिर रायपुर पहुंचीं
मरीज ने बताया कि करीब डेढ़ महीने पहले उन्हें पहली बार सीने में दर्द हुआ था। उन्होंने मधुबनी में डॉक्टर से परामर्श लिया, लेकिन हृदय विशेषज्ञ की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें गैस और एसिडिटी की दवाएं दी गईं।
कुछ दिनों बाद दोबारा सीने में दर्द होने पर परिजन उन्हें दरभंगा के एक बड़े अस्पताल ले गए। वहां एंजियोग्राफी में हृदय की तीनों प्रमुख नसों में ब्लॉकेज का पता चला। डॉक्टरों ने उन्हें बाईपास सर्जरी कराने की सलाह दी।
परिजन पहले पटना में इलाज कराने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान रायपुर में रहने वाले रिश्तेदार ने उन्हें अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट सर्जरी विभाग के बारे में जानकारी दी। इसके बाद मरीज की एंजियोग्राफी की सीडी लेकर परिजन रायपुर पहुंचे और डॉ. कृष्णकांत साहू से परामर्श लिया।
बिहार के आयुष्मान कार्ड से रायपुर में हुआ इलाज
डॉक्टरों ने बताया कि मरीज बिहार की निवासी थीं, इसलिए यह जानकारी लेना जरूरी था कि बिहार के आयुष्मान कार्ड के जरिए छत्तीसगढ़ में उनकी सर्जरी हो सकती है या नहीं।
आयुष्मान योजना कार्यालय से पुष्टि होने के बाद मरीज को अम्बेडकर अस्पताल में भर्ती किया गया और उनका उपचार शुरू हुआ। इस तरह आयुष्मान योजना के तहत उनकी बाईपास सर्जरी की गई।
कम उम्र की महिलाओं में भी बढ़ रहा हृदय रोग का खतरा
डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि आम तौर पर महिलाओं में कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा पुरुषों की तुलना में कम माना जाता है और यह बीमारी महिलाओं में अक्सर अधिक उम्र में सामने आती है। हालांकि, अनियंत्रित मधुमेह, मोटापा, तंबाकू का सेवन, पारिवारिक इतिहास, निष्क्रिय जीवनशैली और अस्वास्थ्यकर खान-पान जैसी वजहों से महिलाओं में कम उम्र में भी हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।
उन्होंने महिलाओं से अपील की कि सीने में दर्द, सांस फूलना, असामान्य थकान या अन्य हृदय संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सकीय जांच कराएं।
पड़ोसी राज्यों के मरीजों का भी बढ़ रहा भरोसा
अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में ओपन हार्ट सर्जरी, कोरोनरी बाईपास सर्जरी, चेस्ट सर्जरी और विभिन्न वैस्कुलर सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी और अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने इसे संस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के अलावा बिहार और आसपास के राज्यों से भी मरीज जटिल हृदय और ओपन हार्ट सर्जरी के लिए अम्बेडकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
यह घटना सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में उपलब्ध जटिल हृदय सर्जरी की सुविधाओं और मरीजों के बढ़ते भरोसे को भी दर्शाती है।