जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के प्रभारी और AICC महासचिव डॉ. सैयद नसीर हुसैन ने कहा है कि राज्य का दर्जा बहाल होने तक कैबिनेट में शामिल नहीं होने का पार्टी का मौजूदा रुख है, लेकिन इसमें बदलाव का फैसला भी हाईकमान ही करेगा।
तारिक कर्रा के रुख पर बढ़ी चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा का रुख भी चर्चा में है। कर्रा ने पहले स्पष्ट किया था कि कांग्रेस जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किए जाने तक उमर अब्दुल्ला सरकार की कैबिनेट में शामिल नहीं होगी और बाहर से समर्थन जारी रखेगी।
हालांकि, अब केंद्रीय नेतृत्व की ओर से दिए गए बयान के बाद यह साफ हो गया है कि कैबिनेट में शामिल होने या नहीं होने का अंतिम निर्णय स्थानीय नेतृत्व के स्तर पर नहीं लिया जाएगा।
नसीर हुसैन ने क्या कहा?
डॉ. सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल होने तक कैबिनेट में शामिल नहीं होने का पार्टी का घोषित रुख है। हालांकि, इस रुख में किसी तरह का बदलाव करना है या नहीं, इसका अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान करेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में केंद्रीय नेतृत्व ही अंतिम निर्णय लेगा। उनके बयान के बाद उमर अब्दुल्ला सरकार के संभावित कैबिनेट विस्तार में कांग्रेस की भागीदारी को लेकर अटकलें फिर तेज हो गई हैं।
NC ने दिया है कैबिनेट में शामिल होने का न्योता
दरअसल, जम्मू-कश्मीर में सरकार चला रही नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच विधानसभा चुनाव के दौरान गठबंधन हुआ था। 90 सदस्यीय विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 42 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 6 विधायक हैं।
बताया जा रहा है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से कांग्रेस को सरकार में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है। कैबिनेट में कांग्रेस को कितनी हिस्सेदारी मिलेगी, इसे लेकर भी दोनों दलों के बीच चर्चा की खबरें सामने आती रही हैं।
मंत्री पदों को लेकर भी पेच
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के भीतर सरकार में शामिल होने की स्थिति में मिलने वाले मंत्री पदों को लेकर भी अलग-अलग राय रही है। बताया गया है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से एक मंत्री पद की पेशकश की गई, जबकि कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेता दो पदों की मांग कर रहे थे।
इसी बीच पार्टी के स्थानीय और केंद्रीय नेतृत्व के बीच फैसले को लेकर अंतर की चर्चा ने जम्मू-कश्मीर की सियासत को और गर्म कर दिया है।
उमर सरकार के कैबिनेट विस्तार पर नजर
कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से अंतिम निर्णय हाईकमान द्वारा लिए जाने की बात सामने आने के बाद अब सबकी नजर आगामी कैबिनेट विस्तार पर है। यदि कांग्रेस सरकार में शामिल होने का फैसला करती है तो यह जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा।
वहीं, अगर कांग्रेस अपने मौजूदा रुख पर कायम रहती है तो वह सरकार को बाहर से समर्थन देने की नीति जारी रख सकती है।
फिलहाल कांग्रेस हाईकमान की ओर से अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में उमर अब्दुल्ला सरकार में कांग्रेस की एंट्री होगी या नहीं, इस पर सियासी तस्वीर केंद्रीय नेतृत्व के फैसले के बाद ही पूरी तरह साफ होगी।