छात्रों के मुताबिक, पिछले दो-तीन दिनों से बिल्डिंग के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे रही दरारें लगातार बढ़ती नजर आ रही थीं। इसके बाद छात्रों ने मामले की जानकारी कॉलेज प्रशासन और कॉलेज प्रेसिडेंट को दी। शिकायत के बाद PG खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई।
फिलहाल बिल्डिंग के बाहर MCD की सील लगी है और छात्रों को वापस अंदर जाने की अनुमति नहीं है।
एक फ्लोर पर रहते थे करीब 16 छात्र
छात्रों के अनुसार, PG में बड़ी संख्या में विद्यार्थी रह रहे थे। एक फ्लोर पर करीब 16 छात्रों के रहने की व्यवस्था थी। एक कमरे में दो छात्र रहते थे, जबकि एक फ्लोर पर करीब आठ कमरे बताए गए हैं।
छात्रों ने बताया कि एक बेड के लिए करीब 8 हजार रुपये तक खर्च आता था। वहीं नॉन-AC कमरे का किराया करीब 7 हजार रुपये, खाने के लिए करीब 5 हजार रुपये और बिजली का बिल अलग से देना पड़ता था। छत पर बने कुछ कमरों में ट्रिपल शेयरिंग की व्यवस्था भी थी।
PG खाली होने के बाद कॉलेज में मिली अस्थायी जगह
बिल्डिंग खाली होने के बाद छात्रों के सामने सबसे बड़ी समस्या रहने की हो गई। फिलहाल कुछ छात्रों को कॉलेज में दो-तीन दिन के लिए अस्थायी रहने की व्यवस्था दी गई है। इसके बाद उन्हें खुद नया PG, कमरा या फ्लैट तलाशना होगा।
छात्रों का कहना है कि नया ठिकाना ढूंढने के साथ सबसे बड़ी चिंता अतिरिक्त खर्च की है। नया कमरा या फ्लैट लेने पर सिक्योरिटी मनी, ब्रोकरेज और एडवांस किराए का बोझ बढ़ रहा है।
पुरानी सिक्योरिटी को लेकर भी छात्रों की परेशानी
एक छात्र ने बताया कि नया फ्लैट लेने के लिए ब्रोकरेज और सिक्योरिटी देनी पड़ रही है, जबकि पुराने PG में जमा रकम अभी वापस नहीं मिली है। हालांकि छात्रों के मुताबिक, PG की सिक्योरिटी राशि वापस करने की बात कही गई है।
छात्रों का आरोप है कि बिल्डिंग में दिखाई दे रही दरारों को शुरुआत में गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका कहना है कि जब दरारें बढ़ती दिखाई दीं तो उन्होंने कॉलेज प्रशासन को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद बिल्डिंग खाली कराई गई।
छात्रों में डर का माहौल
बिल्डिंग खाली होने के बाद छात्रों में डर का माहौल है। उनका कहना है कि जिस जगह पर वे लंबे समय से रह रहे थे, वहां अब वापस जाने में उन्हें डर लग रहा है।
एक छात्र ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि “जान है तो जहान है” और सभी छात्रों के बीच दहशत का माहौल है।
PG के केयरटेकर ने दरारों से किया इनकार
वहीं, छात्रों के आरोपों के बीच PG के केयरटेकर योगेंद्र ने अलग पक्ष रखा है। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से बिल्डिंग खाली करने के निर्देश दिए गए थे।
दरारों के सवाल पर केयरटेकर ने इससे इनकार किया। उनका दावा है कि वह खुद इसी बिल्डिंग में रहते हैं और इमारत करीब 15-16 साल पुरानी है।
हालांकि, मौके पर बिल्डिंग के कई हिस्सों में दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है और अब MCD ने भी इमारत को सील कर दिया है।
जांच के बाद सामने आएगी दरारों की असली वजह
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिल्डिंग में दरारें क्यों आईं। क्या इसकी वजह इमारत की उम्र है, निर्माण से जुड़ी कोई समस्या है या रखरखाव में लापरवाही हुई है—इसका जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
राहत की बात यह है कि सभी छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। लेकिन अब उनके सामने नया ठिकाना तलाशने और उसके लिए अतिरिक्त खर्च जुटाने की चुनौती है। एक तरफ छात्र जर्जर इमारत को लेकर चिंतित हैं, तो दूसरी तरफ जमा सिक्योरिटी और नए आवास का खर्च उनके लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।