वृंदावन की गलियों में महसूस किया अपनापन
वृंदावन पहुंचने के बाद गणेश निषाद ने अपने यात्रा अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां की हर गली, हर चौराहा और हर घाट में एक अलग तरह का अपनापन महसूस होता है। कहीं श्रद्धालुओं के बीच गूंजता “राधे-राधे” मन को भक्तिमय कर देता है, तो कहीं मंदिरों की घंटियों की आवाज वातावरण में आध्यात्मिक रंग भर देती है।
गणेश ने बताया कि यमुना जी के किनारे बैठने पर मन को अलग तरह की शांति और सुकून मिलता है। वृंदावन की भक्ति और वातावरण उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।
साइकिल से देख रहे भारत की संस्कृति
गणेश निषाद अपनी यात्रा के दौरान साइकिल से अलग-अलग स्थानों का भ्रमण कर रहे हैं। इस सफर के जरिए वे भारत की संस्कृति, धार्मिक स्थलों, परंपराओं और प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने और समझने का प्रयास कर रहे हैं।
उनका कहना है कि वृंदावन को जितना घूमते हैं, उतना ही यहां और समय बिताने का मन करता है। यहां की आध्यात्मिक अनुभूति उनकी भारत दर्शन यात्रा को और भी खास बना रही है।
‘राधे-राधे’ के जाप के साथ आगे बढ़ रहा सफर
गणेश निषाद अपनी साइकिल यात्रा के दौरान लगातार “राधे-राधे” का जाप करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। उनका मानना है कि ईश्वर के नाम का स्मरण करते हुए किया जा रहा यह सफर उनके लिए बेहद आनंददायक और सुखद अनुभव बन गया है।
ग्राम बोरसी के गणेश निषाद की यह साइकिल यात्रा सिर्फ भारत भ्रमण नहीं, बल्कि देश की संस्कृति, आस्था और विविधता को करीब से महसूस करने का एक अनोखा प्रयास भी बनती जा रही है। उनके सफर की आगे की यात्रा को लेकर क्षेत्र के लोगों में भी उत्सुकता बनी हुई है।