हादसा उस समय हुआ जब मजदूर चर्च की निर्माणाधीन इमारत की छत पर कंक्रीट डालने का काम कर रहे थे। अचानक करीब 20 फीट की ऊंचाई पर लगा स्टील मचान और सपोर्ट फ्रेमवर्क ढह गया। देखते ही देखते निर्माण सामग्री और मलबे के नीचे कई मजदूर दब गए।
NDRF समेत कई टीमें रेस्क्यू में जुटीं
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग, जिला प्रशासन और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं। अरक्कोणम से पहुंची NDRF की विशेष टीम ने स्थानीय बचाव दल के साथ मिलकर मलबे में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।
घायलों को एंबुलेंस के जरिए वेल्लोर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) अस्पताल और आंध्र प्रदेश के चित्तूर स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जिला कलेक्टर ने संभाली कमान
वेल्लोर की जिला कलेक्टर पी.एस. लीला एलेक्स ने राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी की। अधिकारियों के अनुसार, घायलों में कम से कम आठ की हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है।
हादसे की जांच के आदेश
हादसे के बाद जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि निर्माणाधीन ढांचा आखिर क्यों ढहा और क्या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था।
अधिकारी निर्माण कार्य से जुड़े सपोर्ट सिस्टम, स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी, बिल्डिंग बायलॉज और जरूरी सरकारी मंजूरियों की भी जांच करेंगे। हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने के साथ ही लापरवाही सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।