द्विपक्षीय संबंधों पर हुई बातचीत
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS से जुड़ी बैठकों में ईरान की नियमित और उच्चस्तरीय भागीदारी की सराहना की।
दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम पर भी विचार साझा किए। प्रधानमंत्री ने भारत के रुख को दोहराते हुए कहा कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता की जरूरत पर भी जोर दिया।
नौवहन और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर जोर
बैठक में समुद्री आवाजाही और व्यापार की स्वतंत्रता का मुद्दा भी अहम रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने नौवहन और वाणिज्य की स्वतंत्रता बनाए रखने तथा नागरिकों, वाणिज्यिक जहाजों और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच यह मुद्दा भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्षेत्र में होने वाले घटनाक्रम का अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन पर असर पड़ सकता है।
BRICS में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा
भारत और ईरान BRICS के साथ-साथ SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी सहयोग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान ईरान के साथ सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
भारत और ईरान के संबंधों में चाबहार बंदरगाह और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े संबंधों को मजबूत करने पर जोर रहा है।
क्यों अहम है मोदी-पेजेश्कियान की मुलाकात?
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत और ईरान के शीर्ष नेताओं की बातचीत कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत लगातार क्षेत्र में तनाव कम करने और विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने की वकालत करता रहा है।
ऐसे समय में मोदी और पेजेश्कियान की बैठक में शांति, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा दोनों देशों के बीच रणनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।