प्रधानमंत्री ने स्टॉल पर प्रदर्शित पारंपरिक कलाकृतियों को करीब से देखा और कलाकारों से शिल्प निर्माण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। इस दौरान बस्तर की सांस्कृतिक पहचान 'बस्तरिया रेला' की प्रस्तुति देकर कलाकारों ने उनका स्वागत किया।
डोकरा, बांस और कोसा शिल्प ने खींचा ध्यान
छत्तीसगढ़ के स्टॉल पर प्रदेश की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है। यहां डोकरा शिल्प, लौह शिल्प, बांस से बनी कलाकृतियां और प्रसिद्ध कोसा सिल्क की साड़ियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इन कलाकृतियों को देखकर कलाकारों के काम की सराहना की। उन्होंने बांस और अन्य लोकशिल्प तैयार करने वाले शिल्पकारों से बातचीत कर उनकी कला के बारे में भी जाना।
बस्तरिया रेला की प्रस्तुति से हुआ स्वागत
प्रधानमंत्री के छत्तीसगढ़ स्टॉल पहुंचने पर बस्तर के कलाकारों ने पारंपरिक बस्तरिया रेला की सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। इस लोकनृत्य के माध्यम से कलाकारों ने प्रदेश की जनजातीय संस्कृति और लोकपरंपराओं की झलक पेश की।
इस आयोजन में बस्तर और नारायणपुर के कलाकारों की भागीदारी ने छत्तीसगढ़ की आदिवासी कला और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर दिया।
पर्यटन स्थलों की खूबसूरती से भी कराया जा रहा परिचय
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की ओर से लगाए गए इस स्टॉल में केवल हस्तशिल्प ही नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है।
स्टॉल पर चंपारण, चित्रकोट जलप्रपात समेत राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों और पर्यटन रिसॉर्ट की विशेषताओं को प्रदर्शित किया गया है। इसके जरिए देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले पर्यटकों को छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक पहचान और पर्यटन की संभावनाओं से परिचित कराया जा रहा है।
15 दिनों तक चलेगा भारत पर्व का आयोजन
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की डॉ. सुभदा चतुर्वेदी ने बताया कि गुजरात के एकता नगर में 30 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक भारत पर्व का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों की कला, संस्कृति, हस्तशिल्प और पर्यटन से जुड़ी विशेषताओं को प्रदर्शित किया जा रहा है।
भारत पर्व में छत्तीसगढ़ की भागीदारी से प्रदेश के स्थानीय कलाकारों और पारंपरिक शिल्पकारों को अपनी कला को व्यापक पहचान दिलाने का अवसर मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छत्तीसगढ़ के स्टॉल का अवलोकन और कलाकारों से संवाद प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के लिए खास उपलब्धि माना जा रहा है।