दुर्ग। दुर्ग जिले में वाहन से बरामद 4 करोड़ रुपये की नकदी को वापस पाने के लिए कारोबारी कमलेश आर. शाह को फिलहाल अदालत से राहत नहीं मिली है। रकम पर अपना मालिकाना हक जताते हुए कारोबारी ने न्यायालय में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। हालांकि, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अंजली सिंह की अदालत ने शुक्रवार को दोनों आवेदनों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आयकर विभाग की जांच पूरी होने से पहले जब्त रकम लौटाना उचित नहीं होगा।


53 करोड़ रुपये बैंक खाते में होने का दिया था हवाला
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कारोबारी कमलेश आर. शाह ने अदालत में दलील दी थी कि उनके बैंक खाते में 53 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है। उन्होंने जब्त 4 करोड़ रुपये को अपनी रकम बताते हुए यह भी दावा किया कि वे नियमानुसार टैक्स का भुगतान कर चुके हैं।

इन्हीं आधारों पर उन्होंने जब्त नकदी वापस दिलाने की मांग की थी। लेकिन अदालत ने फिलहाल उनके तर्कों को स्वीकार नहीं किया और दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं।

आयकर विभाग की जांच के बाद ही होगा फैसला
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बरामद नकदी का मामला अभी आयकर विभाग की जांच के दायरे में है। जब तक रकम के स्रोत और उससे जुड़े वित्तीय तथ्यों की पड़ताल पूरी नहीं हो जाती, तब तक इसे संबंधित कारोबारी को वापस नहीं किया जा सकता।

फैसले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व के न्यायिक आदेशों का भी उल्लेख किया गया। कोर्ट के इस निर्णय के बाद कारोबारी को फिलहाल 4 करोड़ रुपये वापस पाने के लिए जांच पूरी होने का इंतजार करना होगा।

बोलेरो पिकअप के गुप्त चेंबर में छिपे मिले थे 4 करोड़
पूरा मामला 26 अक्टूबर का है। खुर्सीपार थाना क्षेत्र के डबरापारा के पास पुलिस को एक संदिग्ध वाहन में बड़ी मात्रा में नकदी ले जाए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस ने रात करीब 11 बजे सफेद रंग की बोलेरो मैक्स पिकअप (CG 04 QU 5996) को रोककर तलाशी ली।

वाहन रायपुर से नागपुर की ओर जा रहा था। शुरुआती जांच में पुलिस को पिकअप के पिछले हिस्से में कुछ बदलाव नजर आए। इसके बाद जब वाहन की बारीकी से तलाशी ली गई तो पीछे की तरफ एक विशेष गुप्त चेंबर मिला।

वाहन में छिपाकर रखे गए थे नोटों के बंडल
पुलिस ने गुप्त चेंबर को खुलवाया तो उसके अंदर भारतीय मुद्रा के बंडल बरामद हुए। गिनती के बाद नकदी की कुल राशि 4 करोड़ रुपये बताई गई।
वाहन में उस समय दो लोग सवार थे। पुलिस ने चालक भवेशभाई जीनाभाई डाभी और विष्णुदेव दुबे से पूछताछ शुरू की थी। दोनों से नकदी के वास्तविक मालिक, उसके स्रोत और रायपुर से नागपुर ले जाने के उद्देश्य के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है।

आयकर विभाग भी कर रहा मामले की पड़ताल
पुलिस ने बरामद रकम से जुड़े वित्तीय लेन-देन और स्वामित्व की जानकारी जुटाने के लिए आयकर विभाग को सूचना देने की प्रक्रिया अपनाई है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी नकदी कहां से आई और इसे किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था।

फिलहाल अदालत से दोनों याचिकाएं खारिज होने के बाद 4 करोड़ रुपये की रकम वापस नहीं मिलेगी। आयकर विभाग की जांच पूरी होने के बाद ही नकदी के स्रोत और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
Published By- | 31-Oct-2026 04:15:00 pm