नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित विपक्ष की महारैली से पहले INDIA गठबंधन के भीतर मतभेद सामने आने लगे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के विरोध में कांग्रेस की अगुवाई में होने वाले इस प्रदर्शन से चार प्रमुख राजनीतिक दलों ने दूरी बना ली है। इनमें आम आदमी पार्टी (AAP), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और बीजू जनता दल (BJD) शामिल हैं। वहीं, तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की भागीदारी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

रैली से पहले विपक्षी एकजुटता को लगा झटका
कांग्रेस इस महारैली के जरिए चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की आवाज बुलंद करने की तैयारी में है। पार्टी का उद्देश्य मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को घेरना है।
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हालांकि, रैली से पहले ही कई क्षेत्रीय दलों के पीछे हटने से विपक्षी एकता पर सवाल उठने लगे हैं। INDIA गठबंधन में शामिल और उससे बाहर के कुछ प्रमुख दलों का इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होना कांग्रेस के लिए राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है।

AAP और कांग्रेस के बीच जारी है सियासी खींचतान
आम आदमी पार्टी के रैली में शामिल नहीं होने के पीछे दिल्ली और पंजाब के राजनीतिक समीकरण अहम माने जा रहे हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और AAP के रिश्तों में तल्खी बढ़ी है।

पंजाब में भी दोनों दल एक-दूसरे के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं। ऐसे में कांग्रेस के साथ दिल्ली में एक ही मंच साझा करना AAP के लिए राजनीतिक रूप से सहज नहीं माना जा रहा है।

DMK के सामने तमिलनाडु का अलग राजनीतिक समीकरण
तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK ने भी इस रैली से दूरी बनाई है। राज्य में अभिनेता विजय की नई पार्टी TVK के राजनीतिक प्रभाव और बदलते चुनावी समीकरणों के बीच DMK अपनी रणनीति को लेकर सतर्क नजर आ रही है।

कांग्रेस और DMK के बीच राज्य की राजनीति को लेकर भी अलग-अलग परिस्थितियां हैं, जिसका असर विपक्षी दलों के साझा कार्यक्रमों पर दिखाई दे सकता है।

विजय की TVK को लेकर अब भी असमंजस
तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी TVK की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पार्टी ने अभी तक रामलीला मैदान में होने वाली रैली में शामिल होने को लेकर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।

नई राजनीतिक पार्टी होने के कारण TVK फिलहाल अपने संगठन और राज्य में राजनीतिक आधार मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। ऐसे में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के इस बड़े प्रदर्शन में उसकी भागीदारी को लेकर अटकलें जारी हैं।

BJD ने भी बनाई दूरी, अपनी अलग राजनीतिक नीति पर कायम
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (BJD) ने भी इस रैली में शामिल होने से परहेज किया है। BJD लंबे समय से कांग्रेस और भाजपा दोनों से अलग राजनीतिक पहचान बनाए रखने की रणनीति पर चलती रही है।

ऐसे में दिल्ली में कांग्रेस के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल न होना उसकी इसी राजनीतिक नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कांग्रेस, सपा, RJD और JMM के सहारे विपक्षी शक्ति प्रदर्शन
कई दलों के दूरी बनाने के बावजूद कांग्रेस इस रैली को सफल बनाने में जुटी है। समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) समेत अन्य विपक्षी दलों के नेताओं की भागीदारी की उम्मीद है।

कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी वाड्रा जैसे वरिष्ठ नेता इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। वहीं, तेजस्वी यादव और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित विपक्षी नेताओं की मौजूदगी भी प्रस्तावित है।

विपक्षी एकता के दावों पर उठे सवाल
रामलीला मैदान की यह रैली विपक्ष के लिए चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर एकजुटता दिखाने का अवसर मानी जा रही है। लेकिन प्रमुख क्षेत्रीय दलों की गैरमौजूदगी ने गठबंधन के भीतर आपसी तालमेल को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

अब देखना होगा कि 1 नवंबर को होने वाली इस रैली में कौन-कौन से दल और नेता शामिल होते हैं और विपक्ष इस मंच के जरिए अपनी राजनीतिक एकजुटता का कितना प्रभावी संदेश दे पाता है।
Published By- | 31-Oct-2026 03:18:00 pm