NDA से शुरू हुआ सफर, 1986 में वायुसेना में हुए शामिल
एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया था। इसके बाद उन्होंने अपने लंबे सैन्य करियर में कई महत्वपूर्ण परिचालन और रणनीतिक जिम्मेदारियां निभाईं।
उन्हें ऑपरेशनल गतिविधियों, विमान परीक्षण, रक्षा क्षमताओं के विकास और तीनों सेनाओं के बीच समन्वय से जुड़े कार्यों का व्यापक अनुभव है। उनकी विशेषज्ञता को वायुसेना के भविष्य के आधुनिकीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मिराज-2000 और जगुआर जैसे लड़ाकू विमान उड़ाने का अनुभव
नए वायुसेना प्रमुख एक प्रशिक्षित फाइटर पायलट होने के साथ क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी हैं। उनके नाम 3,300 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव दर्ज है।
उन्होंने मिराज-2000, मिग सीरीज के विभिन्न उन्नत लड़ाकू विमानों और जगुआर जैसे विमानों को उड़ाया है। इसके अलावा उन्हें कई प्रमुख परिवहन विमानों के संचालन और परीक्षण का भी अनुभव हासिल है।
वायुसेना के आधुनिकीकरण पर रहेगा विशेष फोकस
आशुतोष दीक्षित ऐसे समय में वायुसेना की कमान संभाल रहे हैं, जब भारतीय रक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव हो रहे हैं। स्वदेशी लड़ाकू विमानों और रक्षा उपकरणों के विकास के साथ सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
उनके सामने वायुसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक को शामिल करने और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए सेना को तैयार करने जैसी अहम जिम्मेदारियां होंगी।
'मेक इन इंडिया' और संयुक्त सैन्य रणनीति को मिलेगी अहमियत
देश की तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, थिएटर कमांड व्यवस्था और स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देना भी आने वाले समय की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
फ्लाइट टेस्टिंग और क्षमता विकास के क्षेत्र में एयर चीफ मार्शल दीक्षित का अनुभव इन योजनाओं को आगे बढ़ाने में उपयोगी साबित हो सकता है। अब रक्षा क्षेत्र की नजरें उनके नेतृत्व में भारतीय वायुसेना की नई रणनीति और आधुनिकीकरण की दिशा पर रहेंगी।