नए केंद्र खुलने से क्षेत्र के किसानों को धान बेचने के लिए दूर स्थित खरीदी केंद्रों तक जाने की परेशानी से राहत मिलेगी। इससे किसानों के समय, श्रम और परिवहन खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है।
लंबे समय से की जा रही थी मांग
बुंदिया और बड़सरा में धान उपार्जन केंद्र खोलने की मांग किसान लंबे समय से कर रहे थे। भटगांव विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान ग्रामीणों और किसानों ने मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के सामने अपनी समस्या रखी थी।
किसानों ने बताया था कि मौजूदा धान खरीदी केंद्र दूर होने के कारण उन्हें उपज पहुंचाने में अतिरिक्त समय और ट्रैक्टर सहित परिवहन का खर्च उठाना पड़ता है। इससे धान बेचने की प्रक्रिया उनके लिए परेशानी भरी हो जाती थी।
मंत्री की पहल के बाद मिली मंजूरी
किसानों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री दयाल दास बघेल को पत्र लिखकर दोनों गांवों में नए धान उपार्जन केंद्र खोलने का आग्रह किया था।
मंत्री के प्रयासों के बाद शासन ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 और आगामी वर्षों के लिए बुंदिया और बड़सरा में नए धान उपार्जन केंद्र स्थापित करने की मंजूरी प्रदान कर दी है।
इन समितियों के अंतर्गत खुलेंगे केंद्र
शासन के आदेश के अनुसार, ग्राम बुंदिया में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित बतरा के अंतर्गत धान उपार्जन केंद्र स्थापित किया जाएगा। वहीं ग्राम बड़सरा में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित शिवप्रसादनगर के अंतर्गत नया केंद्र संचालित होगा।
किसानों को मिलेगी सीधी राहत
नए धान उपार्जन केंद्र शुरू होने के बाद किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। स्थानीय स्तर पर ही धान की तुलाई और उपार्जन की सुविधा मिलने से किसानों की परेशानी कम होगी।
इसके साथ ही ट्रैक्टर भाड़े और अन्य परिवहन खर्च में भी बचत होगी। किसानों का समय और श्रम बचेगा तथा धान खरीदी प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
किसानों में खुशी का माहौल
दो नए धान उपार्जन केंद्रों को मंजूरी मिलने के बाद भटगांव क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। किसानों ने शासन के इस फैसले का स्वागत करते हुए मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार जताया है।
किसानों का कहना है कि गांव के नजदीक धान खरीदी केंद्र मिलने से उन्हें अपनी उपज बेचने में बड़ी सुविधा होगी। क्षेत्र के अन्नदाताओं के लिए इसे लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होने के रूप में देखा जा रहा है।