दोनों युवक आर्मी भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। बताया गया कि बेहतर प्रदर्शन और थकान कम महसूस करने की उम्मीद में उन्होंने प्रतियोगिता से पहले कथित तौर पर यह इंजेक्शन लिया था। दौड़ पूरी होने के बाद दोनों मैदान में असहज महसूस करने लगे, जिसके बाद साथियों ने उन्हें सीएचसी खेरागढ़ पहुंचाया। करीब दो घंटे के इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार बताया गया।
16 और 22 साल के हैं युवक
मामला खेरागढ़ क्षेत्र के अऐला गांव का बताया जा रहा है। 16 वर्षीय श्यामवीर सिकरवार 11वीं कक्षा में पढ़ते हैं, जबकि 22 वर्षीय गौरव स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं। दोनों नियमित रूप से दौड़ और शारीरिक अभ्यास करते हैं और सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रतियोगिता में श्यामवीर दूसरे और गौरव चौथे स्थान पर रहे। आयोजकों ने विजेताओं के लिए नकद पुरस्कार भी रखे थे।
इंजेक्शन के इस्तेमाल की जांच जरूरी
युवकों के मुताबिक उन्होंने दौड़ में बेहतर प्रदर्शन के लिए करीब 3 एमएल इंजेक्शन लिया था। हालांकि, किसी पशु के लिए निर्धारित दवा या स्टेरॉयड का इंसानों पर इस्तेमाल गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए इस मामले में दवा की पहचान, उसे किसने उपलब्ध कराया और युवकों ने इसे किस सलाह पर लिया, इसकी जांच महत्वपूर्ण है।
कानूनी कार्रवाई पर क्या हो सकता है?
इस मामले में कानूनी कार्रवाई जांच के तथ्यों और इस्तेमाल की गई दवा पर निर्भर करेगी। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को दवा का नमूना लेकर उसकी जांच करानी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि इंजेक्शन किस स्रोत से मिला। यदि किसी व्यक्ति ने बिना उचित चिकित्सकीय अनुमति के ऐसी दवा उपलब्ध कराई या युवकों को इसका इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की संभावना बन सकती है।
साथ ही, दौड़ प्रतियोगिता के आयोजकों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है कि प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों की सुरक्षा के लिए क्या मेडिकल व्यवस्था मौजूद थी और क्या उन्हें किसी प्रतिबंधित या खतरनाक पदार्थ के इस्तेमाल से रोकने के लिए कोई व्यवस्था की गई थी।
फिलहाल मामले में पूरी कानूनी स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।