दीपाक्षा की यह उपलब्धि सिर्फ एक प्रतियोगिता में जीत नहीं, बल्कि उन महिलाओं के लिए प्रेरणा भी है, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को पीछे छोड़ देती हैं। उन्होंने साबित किया कि मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत के साथ परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए भी अपने लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
तीन राउंड में दिखाया हुनर और आत्मविश्वास
प्रतियोगिता के अलग-अलग राउंड में दीपाक्षा ने अपनी प्रतिभा, व्यक्तित्व और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया। Talent Round में उन्होंने मां, बच्चे और परिवार के रिश्ते को नृत्य प्रस्तुति के जरिए भावनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया।
वहीं Creativity Round में उन्होंने अपनी प्रस्तुति और विशेष रूप से तैयार की गई ड्रेस के जरिए एक बेटी से पत्नी और फिर मां बनने तक के सफर के साथ अपने सपनों के लिए संघर्ष करने वाली महिला की कहानी दिखाई।
जवाबों से भी प्रभावित हुए निर्णायक
Question-Answer Round में दीपाक्षा ने अपनी स्पष्ट सोच और आत्मविश्वास के साथ जवाब देकर निर्णायकों को प्रभावित किया। इसके अलावा उनकी ग्रेसफुल वॉक, पर्सनैलिटी, ड्रेसिंग सेंस और ओवरऑल कॉन्फिडेंस ने भी उन्हें प्रतियोगिता में मजबूत दावेदार बनाया।
जैनम एकेडमी से शिक्षा और सेवा का संकल्प
दीपाक्षा जैन जैनम एकेडमी की Founder हैं। वह बच्चों की शिक्षा, संस्कार और बेहतर भविष्य के लिए काम कर रही हैं। खास बात यह है कि जैनम एकेडमी के माध्यम से वह 50 से अधिक जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निशुल्क शिक्षा भी दे रही हैं।
दीपाक्षा का मानना है कि किसी बच्चे की आर्थिक स्थिति उसके सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। बच्चों को पढ़ाने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के साथ उन्होंने अपने व्यक्तिगत सपनों के लिए भी समय निकाला।
परिवार ने हर कदम पर दिया साथ
दीपाक्षा की सफलता में उनके पति अतुल जैन, मां माया, नन्हे बेटे और पूरे परिवार का अहम योगदान रहा। परिवार ने उन्हें लगातार प्रोत्साहित किया और उनके सपनों को पूरा करने में साथ दिया।
खिताब जीतकर घर लौटने पर परिवार और शुभचिंतकों ने बैंड-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान नन्हे बेटे द्वारा अपनी मां का स्वागत करने का पल भी बेहद भावुक रहा।
VMS और मेंटर्स का जताया आभार
अपनी सफलता के लिए दीपाक्षा ने VMS, कविता मैम और जितेंद्र सर का विशेष आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस मंच ने उन्हें अपनी कहानी, प्रतिभा और सपनों को दुनिया के सामने रखने का अवसर दिया।
दीपाक्षा जैन की यह जीत उनके लिए सिर्फ एक ताज नहीं, बल्कि मेहनत, आत्मविश्वास और अपने सपनों को जिम्मेदारियों के बीच भी जिंदा रखने के हौसले की जीत है। दुर्ग की बेटी और रायपुर की बहू के रूप में उन्होंने अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।