कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर देश में अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।
SIR को लेकर कांग्रेस का विरोध
SIR को लेकर विवाद उस समय और बढ़ा जब 23 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्तों के बीच कई मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। इसके बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस ने देशभर में प्रदर्शन का आह्वान किया है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता की जरूरत है। कांग्रेस नेताओं ने CEC के पद से इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
नड्डा ने विपक्ष पर किया पलटवार
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जनता विपक्ष के इन प्रयासों को पहले भी नकार चुकी है।
नड्डा ने कांग्रेस समेत विपक्षी नेताओं पर चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लेकर लगातार सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य सत्ता हासिल करना है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
विवाद के बीच 26 सितंबर को चुनाव आयोग की पूर्ण बैठक हुई, जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी शामिल हुए। आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि राष्ट्रव्यापी SIR से संबंधित आदेशों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से मंजूरी मिली थी। आयोग ने यह भी कहा कि Form 6 में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।
आयोग ने SIR प्रक्रिया में कुछ बदलाव भी किए हैं। नोटिस पाने वाले ऐसे मतदाताओं, जिनके दस्तावेजों को लेकर अनमैप्ड या तार्किक विसंगति है, उनके घर BLO जाकर दस्तावेज जुटा सकेंगे। सामान्य परिस्थितियों में ऐसे मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए ERO कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं होगी।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा
SIR विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की गई है। याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है और आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों के विपरीत कहा है कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का विरोध जारी है, जबकि चुनाव आयोग ने अपने फैसलों और SIR प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है।