खरगे ने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस अब सीधे तौर पर हिंसा का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में एक मंत्री द्वारा एक युवक को थप्पड़ मारे जाने और जंतर-मंतर पर युवाओं पर लाठीचार्ज का जिक्र किया। हालांकि, इन घटनाओं को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
किसान आंदोलन और लखीमपुर खीरी का किया जिक्र
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पोस्ट में किसान आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया और बड़ी संख्या में किसानों की मौत हुई। उन्होंने लखीमपुर खीरी की घटना का जिक्र करते हुए भी सरकार पर सवाल उठाए।
इसके अलावा खरगे ने गुजरात के ऊना में दलितों के साथ हुई मारपीट और राजनीतिक नेताओं के पुराने बयानों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कई मामलों में पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिला है।
खरगे ने कहा कि जब सत्ता का अहंकार चरम पर पहुंचता है तो जनता के सवालों और विरोध को दबाने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के सवालों का जवाब संवाद के जरिए दिया जाना चाहिए।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लेकर भी उठाए सवाल
बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान खरगे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूर्व केरल मुख्य सचिव जीजी थॉमसन के कथित बयान का हवाला दिया, जिसमें थॉमसन ने दावा किया है कि 2016 में सरकारी सेवा के दौरान ज्ञानेश कुमार ने उन्हें भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था।
खरगे ने कहा कि यदि देश के सर्वोच्च चुनावी पद पर बैठे व्यक्ति को लेकर इस तरह के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से इस्तीफे की मांग भी की।
राजनीतिक विशेषणों को लेकर भी निशाना
खरगे ने भाजपा पर विपक्ष के सवालों से बचने के लिए राजनीतिक विरोधियों के लिए अलग-अलग शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने 'नाराज़ फूफा', 'दिमागी नक्सल' और 'आंदोलनजीवी' जैसे शब्दों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता के सवालों का जवाब देने के बजाय विपक्ष को अलग-अलग नाम दिए जा रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जनता के सवालों और विरोध-प्रदर्शनों को दबाकर लोकतंत्र को कमजोर नहीं किया जा सकता। उनके इन बयानों के बाद राजनीतिक विवाद और आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के संकेत हैं।