दुनिया-जगत

इस रिपोर्ट के जरिए अमेरिका ने भारत पर साधा निशाना

  • विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, बढ़ेगा तनाव?
  • भारत ने खारिज की रिपोर्ट
वॉशिंगटन। अमेरिका की ओर से एक बार फिर के लिए चुभने वाली बात कही गई है। अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने भारत में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अल्पसंख्यकों की स्थिति चिंताजनक है। देश में धर्मांतरण विरोधी कानून बन रहे हैं, हेट स्पीच के मामले बढ़े हैं। इसके अलावा अल्पसंख्यकों के मकानों और उनके धर्मस्थलों को ध्वस्त किया जा रहा है। इस तरह रिपोर्ट में बुलडोजर ऐक्शन पर भी निशाना साधा गया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मातहत आने वाले इस आयोग की ओर से हर साल दुनिया भर के करीब 200 देशों पर रिपोर्ट तैयार की जाती है। इस रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों की स्थिति का अध्ययन किया जाता है।
अमेरिकी आयोग की यह रिपोर्ट पीएम नरेंद्र मोदी के तीसरी बार सत्ता संभालने के ठीक बाद आई है। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन भारत आए थे। उन्होंने इस यात्रा में कई नेताओं से मुलाकात की थी और फिर पीएम नरेंद्र मोदी से भी मिले थे। ऐसे में इस यात्रा के ठीक बाद अमेरिकी आयोग की चुभने वाली रिपोर्ट उल्लेखनीय है। सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'हम देख रहे हैं कि भारत में धर्मांतरण विरोधी कानून बनाए जा रहे हैं। हेट स्पीच के मामले बढ़े हैं। इसके अलावा अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के घरों और उनके धार्मिक स्थलों को भी गिराया जा रहा है।'
अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के मामलों को देखने वाले अमेरिकी राजनयिक रशद हुसैन ने भी इसे लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, 'भारत में ईसाई समुदाय के धार्मिक स्थलों पर स्थानीय उपद्रवी पुलिस के सहयोग से हमले करते हैं। वे यह आरोप लगाते हुए अटैक करते हैं कि धर्मांतरण कराया जा रहा है। ऐसे मामलों में उपद्रवियों की बजाय पीड़ितों को ही गिरफ्तार किया जाता है और उनके खिलाफ केस दर्ज होते हैं।' इससे पहले मई में भी अमेरिकी आयोग ने ऐसी एक रिपोर्ट दी थी, जिसकी भारत सरकार ने आलोचना की थी और उसे खारिज कर दिया था।
तब अमेरिकी आयोग ने भारत सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि उसकी नीतियां भेदभाव बढ़ाने वाली हैं। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि अमेरिका का यह आयोग पक्षपाती है। वह अकसर राजनीतिक एजेंडा चलाता है और भारत को लेकर पूर्वाग्रह रखता है। भारत ऐसी प्रोपेगेंडा भी रिपोर्ट को सिरे से खारिज करता है।

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