दुनिया-जगत

अमेरिकी डोनाल्ड ट्रंप आज व्यापक टैरिफ लागू करने की घोषणा करेंगे

  • "कुछ टैरिफ पहले ही लागू किए जा चुके हैं"
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल को व्यापक टैरिफ लागू करने की तैयारी कर रहे हैं, जिसे व्हाइट हाउस ने 'मुक्ति दिवस' ​​नाम दिया है। हालांकि अभी कई बात साफ नहीं है कि टैरिफ कैसा होगा और कब लागू होगा? यह भी स्पष्ट नहीं है कि टैरिफ का प्रभाव किस देश पर पड़ेगा? ऐसे में दुनिया की निगाहें ट्रंप की घोषणा पर टिकी हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप कह चुके हैं कि टैरिफ रेसिप्रोकल/पारस्परिक होंगे। इसका मतलब है कि देशों पर वही शुल्क लगाया जाएगा जो वे अमेरिका पर लगाते हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि टैरिफ का प्रभाव किस देश पर पड़ेगा, या क्या वे सभी के लिए समान होंगे? लेकिन, एक बात स्पष्ट है कि अमेरिका में प्रवेश करने वाली कारों पर 25% का नया आयात कर 3 अप्रैल से लागू हो जाएगा और अगले कुछ महीनों में कार के पुर्जों पर भी यही टैक्स लगेगा।
कुछ टैरिफ पहले ही लागू किए जा चुके हैं। मार्च में अमेरिका में प्रवेश करने वाले सभी स्टील और एल्युमीनियम पर फ्लैट ड्यूटी को बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया गया। ट्रंप ने पहले ही चीन से आयातित सभी वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाकर 20% कर दिया। कनाडा और मैक्सिको से आने वाली कुछ वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ा दिया। कनाडा ने टैरिफ पर जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी स्टील और एल्युमीनियम पर 25% शुल्क लगाया, जबकि चीन ने भी कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 10-15% टैक्स लगाया।
ट्रंप का तर्क है कि टैरिफ से अमेरिकी मैन्युफैक्चरर को मदद मिलेगी क्योंकि इससे उपभोक्ता अमेरिका निर्मित सामान खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे। हालांकि विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इससे कीमतें बढ़ सकती हैं और व्यापार युद्ध शुरू हो सकता है। यूरोपीय संघ (ईयू) का कहना है कि वह जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस ने कहा कि ट्रंप अंतिम समय में बातचीत के लिए तैयार हैं, 'कुछ' देशों ने घोषणा की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ट्रंप को फोन किया है। टैरिफ विदेश से आयातित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला कर है और यह आमतौर पर उत्पाद के मूल्य का एक प्रतिशत होता है। विदेशी सामान खरीदने वाली कंपनियों को कर का भुगतान करना पड़ता है।
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इज़राइल ने मोदी-नेतन्याहू की ‘घिबली’ फोटो शेयर की

वर्ल्ड : इज़राइल के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू की एक खास एडिटेड तस्वीर शेयर की गई, जो तेजी से वायरल हो रही है। यह तस्वीर जापानी एनीमेशन स्टूडियो 'घिबली' के स्टाइल में बनाई गई है, जिसमें दोनों नेताओं को एक एनीमे थीम में दिखाया गया है।
तस्वीर का मतलब क्या है?
इस तस्वीर को भारत-इज़राइल की मजबूत दोस्ती और डिजिटल डिप्लोमेसी के नए रूप के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत-इज़राइल रिश्तों की झलक- यह तस्वीर दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाती है।
युवा जुड़ाव पर फोकस- स्टूडियो घिबली की लोकप्रियता को देखते हुए यह पोस्ट युवाओं को भी जोड़ने का जरिया बन सकती है।
राजनीतिक संबंधों का नया तरीका- अब कूटनीति पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर डिजिटल और पॉप कल्चर का हिस्सा बन रही है।
भारत-इज़राइल संबंध और नेतन्याहू-मोदी की दोस्ती
2017 में मोदी के ऐतिहासिक इज़राइल दौरे के बाद से दोनों नेताओं की दोस्ती और मजबूत हुई।
रक्षा, कृषि और साइबर सुरक्षा में भारत-इज़राइल का सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
नेतन्याहू और मोदी पहले भी सोशल मीडिया पर मजेदार पोस्ट और गर्मजोशी भरे संदेश साझा कर चुके हैं।
सोशल मीडिया पर कैसा रहा रिएक्शन?
तस्वीर वायरल होते ही ट्विटर और अन्य प्लेटफॉर्म पर लोगों ने इसे शानदार डिजिटल डिप्लोमेसी करार दिया।
कुछ लोगों ने इसे भारत-इज़राइल दोस्ती का नया प्रतीक बताया।
कुछ ने इसे मीम कल्चर से जोड़कर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं।
घिबली स्टूडियो के फैंस ने भी इस पर खास दिलचस्पी दिखाई।
क्या यह नया कूटनीतिक ट्रेंड बनेगा?
आज की डिजिटल डिप्लोमेसी में क्रिएटिव कंटेंट, मीम्स और आर्टवर्क का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। भारत और इज़राइल की यह दोस्ती अब सिर्फ राजनीतिक मंच तक सीमित नहीं रही, बल्कि सोशल मीडिया और पॉप कल्चर का भी हिस्सा बन रही है।
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India-China रिश्तों में नया मोड़?

वर्ल्ड : भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर दोनों देशों ने आपसी सहयोग और संवाद को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। हाल के वर्षों में सीमा विवाद और व्यापारिक तनाव के कारण रिश्तों में खटास आई थी, लेकिन अब कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने और संबंध सुधारने की कोशिशें तेज हो रही हैं।
क्या भारत-चीन संबंध फिर होंगे मजबूत?
बीजिंग और नई दिल्ली दोनों ही अपने राजनयिक संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश में हैं। इस अवसर पर चीनी विदेश मंत्रालय और भारतीय अधिकारियों ने शांति और सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। हालांकि, गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद से दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार और रणनीतिक हितों के कारण भारत और चीन के लिए एक-दूसरे से कटकर रहना मुश्किल है। इसी वजह से 75वीं वर्षगांठ के मौके पर दोनों देशों ने कूटनीतिक संवाद को जारी रखने का संकल्प दोहराया है।
सीमा विवाद अब भी चुनौती-
भले ही दोनों देशों के बीच बातचीत हो रही है, लेकिन LAC (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर तनाव अब भी बरकरार है। भारत कई बार कह चुका है कि जब तक सीमा पर शांति नहीं होगी, तब तक द्विपक्षीय संबंध पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकते।
व्यापार और कूटनीतिक संभावनाएं-
व्यापारिक स्तर पर निर्भरता बरकरार- भारत और चीन के बीच व्यापार 100 अरब डॉलर से ज्यादा का है।
शिक्षा और तकनीकी सहयोग- भारतीय छात्रों और टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए चीन एक बड़ा बाजार बना हुआ है
वैश्विक मंच पर सहयोग- BRICS, SCO जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में दोनों देशों का साथ बना हुआ है।
क्या आगे सुधरेंगे रिश्ते?-
भारत-चीन संबंधों की 75वीं वर्षगांठ पर कूटनीतिक संवाद की नई कोशिशें शुरू हुई हैं, लेकिन सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा अभी भी बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं। ऐसे में देखना होगा कि यह संवाद महज औपचारिकता बनकर रह जाता है या वाकई कोई ठोस नतीजा निकलता है।
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म्यांमार में भीषण भूकंप में 2000 से अधिक लोग मारे गए

World : म्यांमार में 29 मार्च 2025 को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने राजधानी नायप्यितॉ को बुरी तरह से प्रभावित किया। इस भूकंप के कारण अब तक 2000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और सैकड़ों लोग घायल हैं। नायप्यितॉ, जो म्यांमार की सैन्य सत्ता का केंद्र है, पूरी तरह से तबाह हो गया है। शहर के महत्वपूर्ण सरकारी भवनों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों को भारी नुकसान पहुंचा है। भूकंप earthquake के बाद बिजली, पानी और इंटरनेट सेवा बंद हो गई है।
भूकंप के कारण नायप्यितॉ के विशाल महल, विदेशी मंत्रालय और अन्य महत्वपूर्ण संस्थान प्रभावित हुए हैं, लेकिन सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर अधिक प्रभावित नहीं हुआ है। म्यांमार सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की है।
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चिली के राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक ने भारत के साथ संबंधों के विस्तार पर चर्चा की

दिल्ली। चिली के राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक ने अपनी भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार की बढ़ती संभावनाओं पर जोर दिया। हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में बोरिक ने व्यापार, निवेश में सहयोग बढ़ाने के अवसरों और जलवायु परिवर्तन तथा स्थिरता जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।
भारत और चिली के बीच चल रहे और बढ़ते संबंधों पर विचार करते हुए उन्होंने कहा, "मैं प्रधानमंत्री को पिछले नवंबर में रियो डी जेनेरियो में जी20 के दौरान मुझे यह निमंत्रण देने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं, जहां हमें आमंत्रित किया गया था, यह हमारी भागीदारी की एक उपयोगी प्रकृति थी। हम भारत के साथ अपने संबंधों और उन संभावनाओं की क्षमता के लिए आभारी हैं, जिन्हें हमने अभी तक नहीं खोजा है।"
राष्ट्रपति बोरिक ने दोनों देशों के बीच सात दशक लंबे संबंधों को मजबूत करने के प्रयास के रूप में अपनी यात्रा के महत्व पर जोर देते हुए कहा, "आज, हम भारत के साथ अपने सात दशकों के संबंधों को मजबूत करने आए हैं, जो चिली के साथ पहले की यात्राओं पर आधारित हैं। मुझे 16 वर्षों के बाद भारत की यात्रा करने वाला तीसरा राष्ट्रपति होने का सम्मान प्राप्त है।"
उन्होंने वैश्विक क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका के महत्व पर प्रकाश डाला और स्वीकार किया कि भारत अब चिली का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है, एक ऐसी स्थिति जो आगे के सहयोग को आमंत्रित करती है। उन्होंने टिप्पणी की, "भारत हमारे साझेदार के सातवें स्थान पर पहुंच गया है, जो हमें अपने संबंधों को बढ़ाने के लिए आमंत्रित करता है।" बैठक के दौरान, राष्ट्रपति बोरिक और प्रधान मंत्री मोदी ने सहयोग के कई क्षेत्रों पर चर्चा की, विशेष रूप से वाणिज्यिक संबंधों, निवेश और महत्वपूर्ण खनिज उद्योग के क्षेत्रों में। बोरिक ने वैश्विक आर्थिक और पर्यावरणीय परिदृश्य में लिथियम और तांबे जैसे खनिजों के महत्व को नोट किया, जलवायु परिवर्तन से निपटने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
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डोनाल्ड ट्रंप की धमकी पर ईरान की कड़ी चेतावनी

वर्ल्ड : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया धमकी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर उसने अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाया, तो इसके परिणाम गंभीर होंगे। ट्रंप की इस धमकी के तुरंत बाद, ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खामेनेई के प्रमुख सलाहकार ने एक तीव्र प्रतिक्रिया दी, जिससे अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष की आशंका और गहरा गई है।
खामेनेई के सलाहकार ने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा और किसी भी प्रकार की धमकी या दबाव के सामने झुकेगा नहीं। "अगर अमेरिका ने हमारी सुरक्षा को खतरे में डाला, तो हम इसे मुंह तोड़ जवाब देंगे," उन्होंने स्पष्ट किया। यह बयान इस समय में महत्वपूर्ण हो जाता है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की धमकी और ईरान की प्रतिक्रिया के बाद खतरनाक स्थिति बन सकती है, जो केवल दोनों देशों के लिए नहीं, बल्कि पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक शांति के लिए चिंता का विषय हो सकता है। दोनों देशों के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर विवाद चल रहे हैं, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल परीक्षण और अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध शामिल हैं।
इसी बीच, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन इस तनाव को कम करने के लिए दबाव बना रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी गहरे प्रभाव पड़ सकते हैं।
यह स्थिति एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुकी है जहां एक छोटी सी चूक बड़ी वैश्विक संकट का रूप ले सकती है। सभी की नजरें अब इस पर हैं कि क्या दोनों देशों के नेता इस स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा सकते हैं, या फिर यह तनाव युद्ध की ओर बढ़ सकता है।
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ट्रंप ने ज़ेलेंस्की के खनिज समझौते से हटने पर चेतावनी दी

World : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की महत्वपूर्ण खनिजों के समझौते से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं, और चेतावनी दी कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो उन्हें बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "वह दुर्लभ पृथ्वी धातुओं के समझौते से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं और अगर वह ऐसा करते हैं तो उनके पास बहुत बड़ी समस्याएं होंगी।उन्होंने यह भी कहा, "वह नाटो का सदस्य बनना चाहते हैं, लेकिन वह कभी नाटो का सदस्य नहीं बनेंगे, यह वह समझते हैं।"
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पाकिस्तान की तैयारी : 30 लाख अफगानों को देश से बाहर निकालने की योजना

  • ईद के बाद शुरू होगी कार्रवाई
इस्लामाबाद। पाकिस्तान इस साल 30 लाख अफगानों को देश से बाहर निकालने की योजना बना रहा है। यह कदम 2023 में शुरू हुई एक कार्रवाई का हिस्सा है, जिस दौरान अफगानों को अपनी इच्छा से पाकिस्तान छोड़ने का मौका दिया गया था। इसके तहत पाकिस्तान में अवैध रूप से रह रहे अफगानों को बाहर निकाला जा रहा है। सोमवार को इस अभियान की समयसीमा समाप्त हो गया है, जिसके बाद अफगानों को बाहर निकालने की योजना और तेज हो गई है। बता दें कि समयसीमा समाप्त होने के बाद इस योजना के तहत 1 अप्रैल से अफगानों को बाहर निकाला जाना था, लेकिन ईद-उल-फ़ितर के कारण इसे 10 अप्रैल तक टाल दिया गया है।
मामले में पाकिस्तान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अब भी 30 लाख अफगान पाकिस्तान में हैं, जिनमें से कुछ के पास पंजीकरण प्रमाणपत्र हैं, जबकि कुछ के पास कोई कागज नहीं है। पाकिस्तान चाहता है कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी में रहने वाले अफगान 31 मार्च तक शहर छोड़ दें और स्वेच्छा से अफगानिस्तान लौट जाएं। जिनके पास पंजीकरण प्रमाणपत्र हैं, उन्हें 30 जून तक पाकिस्तान में रहने की अनुमति होगी। इसके साथ ही पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि निर्वासित अफ़गान को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे वापस पाकिस्तान न लौटें। सरकार विदेशी राजनयिकों के साथ मिलकर अफगानों के पुनर्वास की योजना पर काम कर रही है। 2021 में तालिबान के कब्जे के बाद हजारों अफगान पाकिस्तान आए थे, लेकिन अब पाकिस्तान उन्हें अपने देश से बाहर निकालने के लिए कदम उठा रहा है।
सम्मान के साथ अपने नागरिकों की वापसी चाहता है तालिबान
दूसरी ओर इस मामले में तालिबान चाहता है कि अफगान शरणार्थी सम्मान के साथ अपने देश वापस लौटें। तालिबान के शरणार्थी मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मुतालिब हक्कानी ने बताया कि पाकिस्तान बिना तालिबान सरकार या संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी को शामिल किए बिना अफगानों के निष्कासन के फैसले ले रहा है, जो उनके अनुसार गलत है। इसके साथ ही हक्कानी ने कहा कि अफगानों को एकतरफा तरीके से निकालना न तो अफगानों के हित में है और न ही पाकिस्तान के। उन्होंने कहा कि इससे पाकिस्तान में अफगानों के खिलाफ नफरत बढ़ सकती है। इसके साथ ही तालिबान ने यह भी कहा कि अफगानों को सम्मान के साथ वापस लाने के लिए एक उचित प्रक्रिया और आपसी समझ होनी चाहिए, ताकि वे अपने देश लौटते समय सम्मानित महसूस करें। वहाला इस निष्कासन प्रक्रिया में मदद के लिए पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में दो ट्रांजिट स्टेशन बनाए जाएंगे। एक स्टेशन पेशावर के नासिर बाग इलाके में होगा और दूसरा लांडी कोटल में, जो तोरखम क्रॉसिंग से करीब सात किलोमीटर दूर है।
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तालिबान नेता ने कहा- अफगानिस्तान में पश्चिमी कानूनों की कोई जरूरत नहीं

काबुल। तालिबान नेता ने रविवार को कहा कि अफगानिस्तान में पश्चिमी कानूनों की कोई जरूरत नहीं है और जब तक शरिया कानून लागू हैं, तब तक लोकतंत्र खत्म हो चुका है।
हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने दक्षिणी शहर कंधार की ईदगाह मस्जिद में ईद-उल-फितर के इस्लामी त्योहार के अवसर पर एक उपदेश में यह टिप्पणी की। उनके संदेश का 50 मिनट का ऑडियो तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक्स पर प्रकाशित किया। अखुंदजादा ने पश्तो में बोलते हुए इस्लामी कानूनों के महत्व पर जोर देते हुए कहा, "पश्चिम से आने वाले कानूनों की कोई जरूरत नहीं है। हम अपने खुद के कानून बनाएंगे।"
तालिबान द्वारा शरिया की व्याख्या के कारण अफगान महिलाओं और लड़कियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिससे उन्हें शिक्षा, कई नौकरियों और अधिकांश सार्वजनिक स्थानों से वंचित कर दिया गया है। इस तरह के उपायों ने तालिबान को विश्व मंच पर अलग-थलग कर दिया है, हालांकि उन्होंने चीन और संयुक्त अरब अमीरात सहित देशों के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए हैं।
2021 में तालिबान द्वारा देश पर कब्ज़ा करने के बाद से अखुंदज़ादा ने नीति निर्देशन में मज़बूती से हाथ बढ़ाया है, हालाँकि कुछ अधिकारियों ने शुरू में अधिक उदार शासन का वादा किया था। अखुंदज़ादा ने रविवार को पश्चिम की आलोचना करते हुए कहा कि गैर-विश्वासी मुसलमानों के खिलाफ़ एकजुट हो गए हैं और अमेरिका और अन्य देश इस्लाम के प्रति अपनी शत्रुता में एकजुट हैं, उन्होंने गाजा में इज़राइल-हमास युद्ध का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अफ़गानिस्तान में लोकतंत्र खत्म हो गया है और शरिया लागू है, उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के समर्थक लोगों को तालिबान सरकार से अलग करने की कोशिश कर रहे हैं।
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म्यांमार में 7.7 का जोरदार भूकंप, घर-पुल मलबे में तब्दील

नई दिल्ली। म्यांमार में शुक्रवार को भूकंप के जोरदार झटकों से धरती कांप उठी. ये झटके इतने जबरदस्त थे कि थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी इन्हें महसूस किया गया. रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 7.7 रही.
भूकंप का केंद्र म्यांमार का सागैंग रहा. भूकंप के झटकों की वजह से म्यांमार के मांडलेय में इरावडी नदी पर कथित तौर पर लोकप्रिय एवा ब्रिज ढह गया. कहा जा रहा है कि चीन और ताइवान के कुछ हिस्सों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं.
- सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें गगनचुंबी इमारतों को भूकंप के झटकों की वजह से हिलते देखा जा सकता है. कई इमारतें झुक गई हैं.
धरती के अंदर सात टेक्टोनिक प्लेट्स हैं. ये प्लेट्स लगातार घूमती रहती हैं. जब ये प्लेट आपस में टकराती हैं, रगड़ती हैं. एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती या उनसे दूर जाती हैं, तब जमीन हिलने लगती है. इसे ही भूकंप कहते हैं. भूकंप को नापने के लिए रिक्टर पैमाने का इस्तेमाल करते हैं. जिसे रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल कहते हैं.
रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल 1 से 9 तक होती है. भूकंप की तीव्रता को उसके केंद्र यानी एपिसेंटर से नापा जाता है. यानी उस केंद्र से निकलने वाली ऊर्जा को इसी स्केल पर मापा जाता है. 1 यानी कम तीव्रता की ऊर्जा निकल रही है. 9 यानी सबसे ज्यादा. बेहद भयावह और तबाही वाली लहर. ये दूर जाते-जाते कमजोर होती जाती हैं. अगर रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 7 दिखती है तो उसके आसपास के 40 किलोमीटर के दायरे में तेज झटका होता है.
कितनी तीव्रता कितनी खतरनाक?
कोई भूकंप कितना खतरनाक है? इसे रिक्टर स्केल पर मापा जाता है. भूकंप में रिक्टर पैमाने का हर स्केल पिछले स्केल के मुकाबले 10 गुना ज्यादा खतरनाक होता है.
- 0 से 1.9 की तीव्रता वाले भूकंप का पता सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही चलता है.
- 2 से 2.9 की तीव्रता का भूकंप आने पर हल्का कंपन होता है.
- 3 से 3.9 की तीव्रता का भूकंप आने पर ऐसा लगता है जैसे मानो बगल से कोई ट्रक गुजर गया हो.
- 4 से 4.9 की तीव्रता के भूकंप में खिड़कियां टूट सकतीं हैं. दीवारों पर टंगे फ्रेम गिर सकते हैं.
- 5 से 5.9 की तीव्रता वाले भूकंप में घर का फर्नीचर हिल सकता है.
- 6 से 6.9 की तीव्रता वाला भूकंप इमारतों की नींव को दरका सकता है, ऊपरी मंजिलों को नुकसान पहुंच सकता है.
- 7 से 7.9 की तीव्रता का भूकंप आने पर इमारतें ढह जातीं हैं. जमीन के अंदर पाइप लाइन फट जातीं हैं.
- 8 से 8.9 की तीव्रता के भूकंप में इमारतों के साथ-साथ बड़े-बड़े पुल भी गिर सकते हैं.
- 9 या उससे ज्यादा की तीव्रता का भूकंप आने पर जमकर तबाही मचती है. कोई मैदान में खड़ा हो तो उसे धरती हिलती हुई दिखाई देगी. समंदर नजदीक हो तो सुनामी आ सकती है.
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नग्न होकर एयरपोर्ट में इधर-उधर दौड़ी महिला

  • यात्रियों को दांतों से काटने भी लगी
अमेरिका। टेक्सास स्थित एक एयरोपोर्ट का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला अचानक कपड़े उतारकर हिंसक हो गई है। खबर है कि महिला ने कई लोगों को घायल किया और लोगों को दांतों से भी काटा। कहा जा रहा है कि वह खुद को देवी वीनस बता रही थी। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
टेक्सास के डेलस पोर्ट वर्थ इंटरनेशनल पर यह घटना 14 मार्च की है। महिला की पहचान समांथा पामा के तौर पर हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला पर एयरपोर्ट के रेस्त्रां मैनेजर को उसकी ही पैंसिल से सिर और चेहरे पर चोट पहुंचाने की कोशिश के आरोप हैं। इसके अलाव उसपर एक शख्स के हाथों पर बुरी तरह से काटने के भी आरोप लगे हैं।
वायरल वीडियो में नजर आ रहा है कि महिला पूरी तरह से नग्न है और पानी फेंक रही है। उसने टीवी की स्क्रीन को तोड़ दिया और अश्लील हरकतें कर रही है। खबर है कि एयरपोर्ट पर मौजूद एक महिला ने पामा को कोट भी दिया, जिसके बाद वह भाग खड़ी हुई और शोर मचाने लगी। पुलिस को पामा टर्मिनल डी के गेट डी1 पर मिली है। खास बात है कि वह खून से लथपथ थी, लेकिन कथित तौर पर उनका नहीं था। इस हरकत के बाद पामा को पुलिस हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने पुलिस को बताया है कि वह उस दिन अपनी दवा नहीं ले सकी थीं। हालांकि, अब तक यह भी साफ नहीं है कि वह किस बीमारी की कौन सी दवा ले रही थीं। उन्होंने पुलिस को यह भी जानकारी दी है कि वह अपनी 8 साल की बेटी के साथ यात्रा कर रही थीं। व्यस्त एयरपोर्ट पर इस तरह के बर्ताव की वजह अब तक साफ नहीं हो सकी है।
कहा जा रहा है कि पामा किसी मानसिक बीमारी का शिकार हो सकती हैं, लेकिन स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस की तरफ से जांच जारी है।
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पाकिस्तान के सेना प्रमुख पर प्रतिबंध लगा सकता है अमेरिका

  • संसद में विधेयक पेश, कई सांसदों का समर्थन
वॉशिंगटन। अमेरिका, पाकिस्तान के सेना प्रमुख पर प्रतिबंध लगा सकता है। इसे लेकर अमेरिका की संसद में एक विधेयक पेश किया गया है, जिसमें पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पर राजनीतिक विरोधियों का दमन करने का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इस विधेयक में पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान को जेल से रिहा करने की भी मांग की गई है। 
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के दक्षिण कैरोलिना से रिपब्लिकन सांसद जो विल्सन और कैलिफोर्निया के डेमोक्रेटिक सांसद जिमी पनेटा ने सोमवार को संसद में 'पाकिस्तान डेमोक्रेसी एक्ट' नामक विधेयक पेश किया। इस द्विदलीय विधेयक में आरोप लगाया गया है कि जनरल आसिम मुनीर जानबूझकर राजनीतिक विरोधियों के दमन और उन्हें कैद करने में शामिल हैं। इस विधेयक में पाकिस्तानी सेना प्रमुख पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। जिसके बाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख अमेरिका में दाखिल नहीं हो सकेंगे और साथ ही उनकी अमेरिका में स्थित संपत्ति को भी जब्त कर लिया जाएगा। इस विधेयक में पाकिस्तानी सेना प्रमुख के साथ ही कई अन्य लोगों पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। 
विधेयक पेश करने वाले जो विल्सन ने पूर्व पीएम इमरान खान को राजनीतिक कैद में रखने का आरोप लगाया और इसके लिए पाकिस्तान की सेना को जिम्मेदार ठहराया। इमरान खान कई मामलों में दोषी पाए जाने के बाद जेल की सजा काट रहे हैं। इमरान खान को अगस्त 2023 में गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वे रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अडियाला जेल में बंद हैं। इमरान खान की पार्टी के अनुसार, पूर्व पीएम के खिलाफ 200 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से कुछ में उन्हें दोषी भी करार दिया गया है। विल्सन ने इस मामले में राष्ट्रपति ट्रंप को पत्र लिखकर पाकिस्तान की सेना पर दबाव बनाने की भी अपील की। साथ ही इमरान खान को रिहा करने की मांग की गई है। 
गौरतलब है कि इस विधेयक को रो खन्ना और इल्हान उमर जैसे करीब 10 सांसदों ने समर्थन दिया है। अगर यह विधेयक पारित हो जाता है तो इससे न सिर्फ पाकिस्तान के सेना प्रमुख के साथ ही पाकिस्तान की सरकार की भी परेशानी बढ़ जाएगी। 
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US ने चीन की दर्जनों कंपनियों को निर्यात प्रतिबंधों की सूची में डाला

वाशिंगटन। अमेरिका ने मंगलवार को चीन की प्रमुख क्लाउड कंप्यूटिंग और बिग डेटा सेवा प्रदाता इंस्पुर ग्रुप की छह सहायक कंपनियों को और अन्य चीनी संस्थाओं को निर्यात प्रतिबंधों की सूची में डाला है। इंस्पुर यूनिट्स पर आरोप है कि वे चीनी सैन्य के लिए सुपरकंप्यूटर विकसित करने में शामिल थे। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अनुसार, इन कंपनियों में पांच चीन में और एक ताइवान में स्थित है।
इस कदम का उद्देश्य चीन के उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग क्षमताओं, क्वांटम तकनीक, उन्नत एआई और हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास को बाधित करना है। वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक ने कहा, "हम अपने तकनीकी संसाधनों को शत्रु देशों को अपने सैन्य बलों को सशक्त बनाने और अमेरिकी नागरिकों की जान को खतरे में डालने के लिए नहीं देने देंगे।"
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जंगल की आग इमारतों तक पहुंची, 18 लोग जिंदा जले

साउथ कोरिया। अमेरिका के कैलिफोर्निया में उत्पात मचाने के बाद अब जंगल की आग ने साउथ कोरिया में भीषण तबाही मचाई है। देश के दक्षिणी क्षेत्र में लगी इस आग में अब तक कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई है। अधिकारियों के अनुसार 18 मृतकों में चार अग्निशामक और सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं।
बुधवार को अधिकारियों ने बताया है कि आग में 200 से ज्यादा इमारतें राख हो चुकी हैं। वहीं लगभग 27 हजार से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। इसे कोरिया के इतिहास की सबसे भीषण जंगल की आग बताया जा रहा है।
दक्षिण कोरिया के कार्यवाहक राष्ट्रपति हान डक-सू ने बताया है कि यह आग बीते शुक्रवार को लगी थी और यह पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक है। हान ने कहा, "नुकसान बढ़ता जा रहा है। ऐसी भीषण आग पहले कभी नहीं देखी गई। हम इस सप्ताह पूरी क्षमता के साथ आग को बुझाने की कोशिश करनी होंगी।" हान ने कहा कि रात भर तेज हवाएं चलने की वजह से जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए कर्मचारियों को संघर्ष करना पड़ रहा है। हान ने आगे बताया कि बुधवार को लगभग 4,650 दमकल कर्मी, सैनिक और अन्य कर्मचारी लगभग 130 हेलीकॉप्टरों की मदद से जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरुवार को थोड़ी राहत मिलने की की उम्मीद है।
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भारतीय सहायता से निर्मित होने वाले शैक्षिक बुनियादी ढांचे की आधारशिला रखी गई

काठमांडू। नेपाल के दैलेख में दुल्लू नगर पालिका में सोमवार को श्री नेपाल राष्ट्रीय माध्यमिक विद्यालय बहुउद्देशीय भवन के निर्माण के लिए आधारशिला रखी गई। श्री नेपाल राष्ट्रीय माध्यमिक विद्यालय बहुउद्देशीय भवन का निर्माण भारत सरकार की वित्तीय सहायता से नेपाली रुपये (एनआर) 39 मिलियन की परियोजना लागत से किया जा रहा है।
कर्णाली प्रांत सरकार के सामाजिक विकास मंत्री घनश्याम भंडारी, काठमांडू में भारतीय दूतावास के काउंसलर अविनाश कुमार सिंह और दुल्लू नगर पालिका, दैलेख के मेयर भरत प्रसाद रिजाल ने संयुक्त रूप से आधारशिला रखी।
नेपाल स्थित भारतीय दूतावास की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है, "श्री नेपाल राष्ट्रीय माध्यमिक विद्यालय बहुउद्देशीय भवन का निर्माण भारत सरकार की वित्तीय सहायता से नेपाल-भारत विकास सहयोग के तहत 39.00 मिलियन नेपाली रुपये की परियोजना लागत से किया जा रहा है। नेपाल-भारत विकास सहयोग के तहत भारत सरकार के अनुदान का उपयोग साढ़े तीन मंजिल के भवन के निर्माण के लिए किया जा रहा है, जिसमें एक हस्तकला प्रदर्शन क्षेत्र, पुस्तकालय, डुल्लू साम्राज्य से संबंधित सांस्कृतिक खंड, बहुउद्देशीय हॉल, कार्यालय क्षेत्र और अन्य संबद्ध सुविधाएं शामिल होंगी। इस परियोजना को उच्च प्रभाव सामुदायिक विकास परियोजना (एचआईसीडीपी) के रूप में लिया जा रहा है और इसे डुल्लू नगर पालिका, दैलेख के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है।"
कर्णाली प्रांत के सामाजिक विकास मंत्री, डुल्लू नगरपालिका के मेयर, दैलेख अध्यक्ष, स्कूल प्रबंधन समिति और अन्य हितधारकों ने नेपाल के लोगों को भारत सरकार द्वारा प्रदान किए जा रहे विकासात्मक समर्थन की सराहना की।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बनाए जा रहे बुनियादी ढांचे से स्कूली छात्रों और स्थानीय समुदाय को डुल्लू साम्राज्य के इतिहास और संस्कृति के बारे में जानने में मदद मिलेगी। यह सीखने के लिए एक बेहतर माहौल बनाने और नेपाल के कर्णाली प्रांत में शिक्षा और संस्कृति क्षेत्रों के समग्र विकास में योगदान करने में भी मदद करेगा।
2003 से, भारत सरकार ने नेपाल में विभिन्न क्षेत्रों में 563 से अधिक HICDP शुरू किए हैं और 495 परियोजनाएँ पूरी की हैं। नेपाल में भारतीय दूतावास की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इनमें से 15 परियोजनाएँ कर्णाली प्रांत में हैं। इनके अलावा, भारत सरकार ने नेपाल के विभिन्न अस्पतालों, स्वास्थ्य चौकियों और शैक्षणिक संस्थानों को 1009 एम्बुलेंस और 300 स्कूल बसें उपहार में दी हैं। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इनमें से 50 एम्बुलेंस और 8 स्कूल बसें कर्णाली प्रांत में उपहार में दी गई हैं।
विज्ञप्ति में आगे कहा गया, "निकट पड़ोसी होने के नाते, भारत और नेपाल व्यापक और बहु-क्षेत्रीय सहयोग में लगे हुए हैं। एचआईसीडीपी का कार्यान्वयन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को बढ़ाकर अपने लोगों की वृद्धि और विकास में नेपाल सरकार के प्रयासों को बढ़ावा देने में भारत सरकार के निरंतर समर्थन को दर्शाता है।" इस अवसर पर राजनीतिक प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, स्कूल शिक्षक, छात्र और उनके माता-पिता भी मौजूद थे। (एएनआई)
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IDF ने गाजा के नासिर अस्पताल पर हमले में हमास के प्रमुख आतंकवादी बरहूम को मार गिराने का किया दावा

Tel Aviv : इज़राइल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने हमास के एक प्रमुख कार्यकर्ता बरहूम की लक्षित हत्या की घोषणा की, जो कथित तौर पर गाजा के नासिर अस्पताल को हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के लिए एक ठिकाने के रूप में इस्तेमाल कर रहा था।
आईडीएफ ने कहा कि व्यापक खुफिया जानकारी जुटाने के बाद सटीक हथियारों के साथ हमला किया गया और हमास पर नागरिक बुनियादी ढांचे को ढाल के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया, इस तरह की कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन बताया।
एक्स पर एक पोस्ट में, आईडीएफ ने कहा, "गाजा में नासिर अस्पताल परिसर के भीतर से काम कर रहे एक प्रमुख हमास आतंकवादी पर सटीक हमला किया गया। यह हमला व्यापक खुफिया जानकारी जुटाने की प्रक्रिया के बाद और सटीक हथियारों के साथ किया गया था ताकि आसपास के पर्यावरण को जितना संभव हो सके नुकसान कम किया जा सके। हमास गाजा की आबादी को क्रूरता से खतरे में डालते हुए नागरिक बुनियादी ढांचे का दोहन करता है - अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन करते हुए जानलेवा आतंकवादी हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने के लिए एक सक्रिय अस्पताल का इस्तेमाल करता है।"
आईडीएफ इंटरनेशनल के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नादव शोशनी ने सोमवार को स्पष्ट किया कि बरहूम अस्पताल में इलाज के लिए नहीं था, बल्कि वह अस्पताल के मरीजों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल कर आतंकी वारदातों को अंजाम दे रहा था।
"यह दावा कि बरहूम नासेर अस्पताल में इलाज के लिए था, पूरी तरह से झूठ है और इसे जनता और मीडिया को गुमराह करने के लिए फैलाया गया था। बरहूम अस्पताल में आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए गया था, उसने अस्पताल के मरीजों और इलाके के लोगों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया।"
शोशनी ने आगे कहा कि अस्पताल में हफ्तों तक रहने के दौरान बरहूम ने अन्य आतंकवादियों और आतंकवादी संगठन के वरिष्ठ लोगों के साथ कई बैठकें कीं।
"वह कई हफ्तों तक अस्पताल में रहा, जिसके दौरान उसने अन्य आतंकवादियों और आतंकवादी संगठन के वरिष्ठ लोगों के साथ बैठकें कीं। हमास आतंकवादी संगठन व्यवस्थित रूप से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करता है और स्कूलों और अस्पतालों सहित नागरिक बुनियादी ढांचे पर कब्जा कर लेता है, इस तरह से कि गाजा के नागरिकों के पुनर्वास और आजीविका को रोका जा सके। हम सुझाव देते हैं कि मीडिया हमास आतंकवादी संगठन और उसके सदस्यों के झूठ को दोहराने से बचें और ऐसे दावों को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की जांच करें," शोशनी ने दावा किया। (एएनआई)

 

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भारत ने पाकिस्तान को दी कश्मीर छोड़ने की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र। भारत ने पाकिस्तान से कहा है कि वह जम्मू और कश्मीर में अवैध रूप से कब्जे वाली जमीन को खाली करे और राज्य प्रायोजित आतंकवाद को सही ठहराना बंद करे। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान द्वारा कश्मीर का मुद्दा बार-बार उठाने की कोशिश के जवाब में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सोमवार को कहा, ऐसे बार-बार के उल्लेख न तो उनके अवैध दावों को सही ठहराते हैं और न ही उनके राज्य द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को उचित ठहराते हैं।
उन्होंने कहा, पाकिस्तान, जम्मू और कश्मीर के क्षेत्र पर अवैध कब्जा जारी रखे हुए है, जिसे उसे खाली करना चाहिए। उन्होंने कहा, यह सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 47 के अनुरूप होगा, जो 21 अप्रैल 1948 को पारित हुआ था और जिसमें पाकिस्तान से अपनी सेनाओं और घुसपैठियों को कश्मीर से हटाने की मांग की गई थी। हरीश ने कहा, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा, हम पाकिस्तान को सलाह देंगे कि वह अपने संकीर्ण और विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इस मंच का ध्यान भटकाने की कोशिश न करे। इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मामलों के कनिष्ठ मंत्री सैयद तारिक फातमी ने कहा कि परिषद को कश्मीर के लिए जनमत संग्रह पर अपने प्रस्ताव को लागू करना चाहिए। हालांकि, उस प्रस्ताव में यह मांग की गई कि पाकिस्तान जम्मू और कश्मीर राज्य से उन कबीलों और पाकिस्तानी नागरिकों को हटाने की व्यवस्था करे, जो वहां सामान्य निवासी नहीं हैं और लड़ाई के उद्देश्य से राज्य में घुसे हैं।
प्रस्ताव में यह भी आदेश दिया गया था कि पाकिस्तान आतंकवादियों की मदद करना या घुसपैठ कराना बंद करे। इसमें इस्लामाबाद से कहा गया कि वह ऐसे तत्वों के राज्य में किसी भी घुसपैठ को रोके और राज्य में लड़ रहे लोगों को सामग्री सहायता प्रदान करने से रोक लगाए। जब परिषद का प्रस्ताव पारित हुआ था, तब जनमत संग्रह नहीं हो सका क्योंकि पाकिस्तान ने कश्मीर से अपनी वापसी की शर्त का पालन करने से इनकार कर दिया था।
भारत का कहना है कि अब जनमत संग्रह अप्रासंगिक हो गया है, क्योंकि कश्मीर के लोगों ने चुनावों में हिस्सा लेकर और क्षेत्र के नेताओं को चुनकर भारत के प्रति अपनी निष्ठा स्पष्ट कर दी है। फातमी ने भारत और पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (यूएनएमओजीआईपी) का जिक्र किया, जिसकी स्थापना 1949 में नियंत्रण रेखा पर युद्ध विराम की निगरानी के लिए की गई थी।
भारत यूएनएमओजीआईपी की मौजूदगी को बमुश्किल बर्दाश्त करता है और इसे इतिहास का अवशेष मानता है, जो 1972 के शिमला समझौते के बाद अप्रासंगिक हो गया। इस समझौते में दोनों देशों के नेताओं ने कश्मीर विवाद को द्विपक्षीय मुद्दा घोषित किया था, जिसमें तीसरे पक्ष के लिए कोई जगह नहीं थी। भारत ने नई दिल्ली में सरकारी इमारत से यूएनएमओजीआईपी को हटा दिया है।
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इज़राइल सेना ने हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमला किया

लेबनान। IDF (इज़राइल रक्षा बल) ने कहा कि उसने हाल ही में लेबनान के बेका घाटी में भूमिगत बुनियादी ढांचे वाले एक सैन्य स्थल और दक्षिणी लेबनान में रॉकेट लांचर वाले एक सैन्य स्थल पर हमला किया, जहाँ हिज़्बुल्लाह आतंकवादी संगठन की गतिविधि देखी गई थी।
इससे पहले, IDF (इज़राइल रक्षा बल) ने पुष्टि की कि इज़राइली बलों ने आतंकवादी एसाम दीब अब्दुल्ला अल-दलिस को खत्म कर दिया, जो हमास के प्रधान मंत्री और गाजा पट्टी में वरिष्ठ सरकारी व्यक्ति थे, जिन्होंने जुलाई 2024 में रूही मुश्तहा की हत्या के बाद उस भूमिका में उनकी जगह ली थी। अपनी भूमिका के हिस्से के रूप में, अल-दलिस गाजा पट्टी में हमास आतंकवादी संगठन के आतंकी शासन के कामकाज के लिए जिम्मेदार था, जिसमें संगठन की सभी प्रणालियाँ और आतंकवादी गतिविधियों के लिए उनका उपयोग शामिल था।
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