धर्म समाज

खाटू श्याम के करे पावन दर्शन, नकारात्मक शक्तियां होंगी दूर

बाबा श्याम को कलयुग का अवतार माना जाता है। श्याम को हारे का सहारा भी कहा जाता है। हर साल लाखों भक्त बाबा श्याम के दरबार में शीश जलाने आते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि बाबा श्याम कौन हैं... और खाटूश्याम जी में बाबा श्याम का मंदिर क्यों बनाया गया है... जो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
महाभारत में उल्लेख है कि भीम के पुत्र घटोत्कच थे और उनके पुत्र बर्बरीक थे। बर्बरीक देवी माँ के भक्त थे। बर्बरीक की तपस्या और भक्ति से प्रसन्न होकर देवी माँ ने उन्हें तीन बाण दिये, जिनमें से एक से वह संपूर्ण पृथ्वी को नष्ट कर सकते थे। ऐसे में जब महाभारत का युद्ध चल रहा था तो बर्बरीक ने अपनी मां हिडिम्बा को युद्ध लड़ने का प्रस्ताव दिया. तब बर्बरीक की माँ ने सोचा कि कौरवों की सेना बड़ी है और पांडवों की सेना छोटी है, इसलिए शायद कौरव युद्ध में पांडवों पर भारी पड़ जायेंगे। तब हिडिम्बा ने कहा कि तुम हारने वाले पक्ष की ओर से लड़ोगे। इसके बाद माता की आज्ञा मानकर बर्बर लोग महाभारत के युद्ध में भाग लेने के लिए निकल पड़े। लेकिन, श्री कृष्ण जानते थे कि यदि बर्बरीक युद्ध स्थल पर पहुँच गए तो जीत पांडवों की होगी, वे कौरवों की ओर से युद्ध लड़ेंगे। इसलिए भगवान कृष्ण ने एक ब्राह्मण का रूप धारण किया और बर्बरीक के पास पहुंचे।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से उसका शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक ने दान स्वरूप अपना शीश बिना किसी प्रश्न के भगवान कृष्ण को दान कर दिया। इस दान के कारण श्री कृष्ण ने कहा कि कलयुग में तुम मेरे नाम से पूजे जाओगे, कलयुग में तुम श्याम के नाम से पूजे जाओगे, तुम कलयुग के अवतार कहलाओगे और हारे का सहारा बनोगे।
जब घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने अपना शीश भगवान श्री कृष्ण को दान में दे दिया, तो बर्बरीक ने महाभारत का युद्ध देखने की इच्छा व्यक्त की, तब श्री कृष्ण ने बर्बरीक का शीश एक ऊँचे स्थान पर रख दिया। तब बर्बरीक ने संपूर्ण महाभारत युद्ध देखा। युद्ध की समाप्ति के बाद भगवान कृष्ण ने बर्बरीक का सिर गर्भवती नदी में फेंक दिया। इस प्रकार बर्बरीक यानि बाबा श्याम का शीश गर्भवती नदी से खाटू (उस समय खाटुवांग शहर) में आ गया। आपको बता दें कि खाटूश्यामजी में गर्भवती नदी 1974 में लुप्त हो गई थी.
स्थानीय लोगों के अनुसार, पीपल के पेड़ के पास एक गाय प्रतिदिन अपने आप दूध देती थी, ऐसे में जब लोगों ने उस स्थान की खुदाई की तो वहां से बाबा श्याम का सिर निकला। बाबा श्याम का यह शीश फाल्गुन माह की ग्यारस को प्राप्त हुआ था इसलिए बाबा श्याम का जन्मोत्सव भी फाल्गुन माह की ग्यारस को मनाया जाता है। खुदाई के बाद ग्रामीणों ने बाबा श्याम का सिर चौहान वंश की नर्मदा देवी को सौंप दिया। इसके बाद नर्मदा देवी ने बाबा श्याम को गर्भ गृह में स्थापित कर दिया और जिस स्थान पर बाबा श्याम को खोदा गया था, वहां पर एक श्याम कुंड बनाया गया।
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ज्येष्ठ पूर्णिमा पर बनेंगे कई मंगलकारी योग

  • भगवान शिव को लगाएं खीर का भोग
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को बेहद शुभ माना जाता है। हर माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के अगले दिन पूर्णिमा होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार अभी ज्येष्ठ माह चल रहा है और इस माह की पूर्णिमा तिथि 22 जून को मनाई जाएगी। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 21 जून को सुबह 07.31 बजे शुरू होगी और इस तिथि का समापन 22 जून को सुबह 06.37 बजे होगा। इस दौरान भगवान श्री हरि विष्णु और भगवान भोलेनाथ की पूजा करना शुभ होता है। इसके अलावा पूर्णिमा तिथि पर जप-तप और दान-पुण्य किया जाता है।
ज्येष्ठ पूर्णिमा को लेकर धार्मिक मान्यता-
पंडित चंद्रशेखर मलतारे के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। विधि-विधान से पूजा करने पर साधक को सुख, सौभाग्य और यश की प्राप्ति होती है। ज्येष्ठ पूर्णिमा की शाम को भगवान शिव का पूजन करने के साथ चंद्रदेव की भी आराधना करना चाहिए। भगवान शिव को चावल की खीर का भोग लगाना चाहिए।
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर बनेंगे ये शुभ योग-
शुक्ल योग- ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि पर दुर्लभ शुक्ल योग शाम 04.45 बजे तक है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं। साथ ही भगवान विष्णु की पूजा करने से सुख, सौभाग्य और धन में वृद्धि होती है।
शिव वास योग- ज्येष्ठ पूर्णिमा पर शिव वास योग का निर्माण सुबह 6.38 बजे होगा, जो 23 जून को सुबह 5.12 बजे तक रहेगा। इस दौरान भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए।
ब्रह्म योग- ज्येष्ठ पूर्णिमा पर ब्रह्म योग शाम 04.46 बजे से पूरी रात तक रहेगा। ज्योतिष ब्रह्म योग को शुभ माना जाता है। इस दौरान भगवान शिव का स्मरण करना चाहिए।

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राम जन्मभूमि मंदिर में मोबाइल फोन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध

अयोध्या। अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर ने अपने परिसर में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला श्रीराम जन्मभूमि थियात क्षेत्र और अयोध्या सरकार ने मिलकर लिया है. अधिकारियों ने सुरक्षा चिंताओं और उपासकों की सुविधा सुनिश्चित करने की आवश्यकता का हवाला दिया।मंदिर प्रबंधक अनिल मिश्रा ने आने वाले सभी श्रद्धालुओं से नये नियमों का पालन करने को कहा है. विश्वासियों की सुविधा के लिए, मंदिर के बगल में एक ड्रेसिंग रूम सुसज्जित है।एएनआई से बात करते हुए, मिश्रा ने कहा, “प्रशासन के साथ हालिया बैठक में, हमने भक्तों की सुरक्षा और सुविधा के बारे में चिंता व्यक्त की, जिसके कारण यह निर्णय लिया गया। हम सभी समर्थकों से इस निर्णय का अनुपालन करने का आह्वान करते हैं...'' हमारे पास पर्याप्त क्षमताएं हैं। भक्तों को इन सुविधाओं का उपयोग करने और मोबाइल फोन और अन्य कीमती सामानों के सुरक्षित भंडारण में सहायता करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।''
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अमलेश्वर में शिव महापुराण कथा का आज दूसरा दिन, उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

  • पंडित प्रदीप मिश्रा दान में मिले पैसे को कुबेरेश्वर धाम में करते हैं खर्च, नहीं लेते कथा फीस
रायपुर। अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा (सीहोर वाले) का रायपुर के अमलेश्वर में शिव महापुराण कथा का आयोजन रविवार 26 मई से प्रारंभ हो गया है, जो कि 2 जून तक जारी रहेगा। इस कथा प्रवचन को सुनने लाखों की संख्या में श्रद्धालु की भीड़ उमड़ रही है। इस देखते हुए सुरक्षा और सुविधा के मद्देनजर प्रशासन ने व्यापक तैयारी की है। इसी तरह पुलिस ने भी ट्रैफिक व्यवस्था की कमान संभाल ली है। यातायात पुलिस ने कथा प्रवचन से पहले शहर के लिए रोडमैप भी जारी किया था। इस आयोजन के बीच स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी अलर्ट पर रखा गया है।
प्रदीप मिश्रा की कथा शुरू होने से पहले एक बार फिर ये सवाल पूछा जा रहा है कि प्रदीप मिश्रा एक कथा के लिए कितनी फीस लेते हैं? बता दें कि पंडित प्रदीप मिश्रा कथा के लिए किसी प्रकार की फीस चार्ज नहीं करते हैं, जिसका खुलासा वे कई बार मीडिया के सामने कर चुके हैं। पिछले साल भिलाई में उनकी कथा का आयोजन जजमान विनोद के द्वारा कराया गया था। इस दौरान भी पंडित प्रदीप मिश्रा ने मीडिया के सामने आकर बताया था कि वे कथा के लिए फीस नहीं लते हैं। इस दौरान उनके साथ जजमान विनोद भी थे, उन्होंने भी इस बात की पुष्टि की थी कि पंडित प्रदीप मिश्रा कथा के लिए किसी प्रकार की फीस नहीं लेते हैं। हालांकि अभी इस बात की जानकारी नहीं मिल पाई है कि अमलेश्वर में उन्होंने आयोजकों से कथा के लिए कितनी फीस ली है।
ज्ञात हो कि पंडित प्रदीप मिश्रा एक यूट्यूब चैनल भी चलाते हैं, इससे भी उनकी आमदनी होती है। वे अपनी कमाई का एक हिस्सा गरीबों को दान में दे देते हैं। इसके अलावा कथा के दौरान हुई चढ़ोतरी से भी उनकी आय होती है, जिसे वे कुबेरेश्वर धाम में लगाते हैं।
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महेश नवमी पर करें ये काम, मिलेगा मनचाहा वरदान

सनातन धर्म में व्रत त्योहारों की कमी नहीं है और सभी का अपना महत्व होता है लेकिन महेश नवमी को खास माना गया है जो कि हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर मनाया जाता है। यह तिथि भगवान शिव की साधना आराधना को समर्पित होती है ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा की जाती है और उपवास भी रखा जाता है माहेश्वरी समाज के लिए यह तिथि बहुत ही महत्वपूर्ण होती है।
माना जाता है कि इसी दिन माहेश्वरी समाज के वंश की उत्पत्ति हुई थी। यही कारण है कि इस दिन को अधिक विशेष माना जाता है महेश नवमी के दिन शिव मंदिरों में विशेष आयोजन किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि महेश नवमी के दिन पूजा पाठ और व्रत करने से मनचाहा वर प्राप्त होता है तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा महेश नवमी की तारीख और मुहूर्त की जानकारी प्रदान कर रहे हैं तो आइए जानते हैं।
महेश नवमी की तारीख और मुहूर्त-
हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 15 जून को देर रात 12 बजकर 3 मिनट से आरंभ हो रही है जो कि अगले दिन यानी की 16 जून को देर रात 2 बजकर 32 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। ऐसे में 15 जून को महेश नवमी का व्रत पूजन किया जाएगा। ज्योतिष अनुसार इसी दिन सूर्य भी राशि परिवर्तन करेंगे। इसके अगले दिन यानी 16 जून को गंगा दशहरा का पावन पर्व मनाया जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महेश नवमी के शुभ दिन पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करें साथ ही दिनभर का उपवास रखें। माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान शिव और देवी पार्वती की असीम कृपा बरसती है और जीवन की परेशानियों और बाधाओं से राहत मिल जाती है।
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शनिदेव को ऐसे करें प्रसन्न, सभी परेशानियां होंगी दूर

हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी देवता की साधना आराधना को समर्पित होता है वही शनिवार का दिन भगवान शनिदेव की पूजा के लिए उत्तम माना जाता है इस दिन भक्त भगवान शनिदेव की विधिवत पूजा करते हैं और दिनभर उपवास भी रखते हैं माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान श्री शनिदेव की कृपा बरसती है लेकिन किसी भी देवी देवता की पूजा बिना आरती के पूर्ण नहीं मानी जाती है
ऐसे में अगर आप शनिदेव को शीघ्र प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाना चाहते हैं या फिर व्रत पूजन का फल प्राप्त करना चाहते हैं तो हर शनिवार के दिन संध्याकाल शनि मंदिर जाकर भगवान की विधि विधान से पूजा करें साथ ही श्री शनि देव की आरती भी भक्ति भाव से पढ़ें।
माना जाता है कि ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों के जीवन से सारे दुख और कष्ट को समाप्त कर देते हैं साथ ही साधक को भाग्य का भरपूर साथ मिलता है जिससे सभी कार्यों में सफलता हासिल होती है और परेशानियां दूर रहती है तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं शनिदेव की संपूर्ण आरती पाठ।
शनिदेव की आरती-
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनि देव....
श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
जय जय श्री शनि देव....
क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
जय जय श्री शनि देव....
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
जय जय श्री शनि देव....
जय जय श्री शनि देव....
देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।
जय जय श्री शनि देव....
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शनि अमावस्या पर करें ये उपाय, पितृ दोष से मिलेगा निजाज

सनातन धर्म में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के अगले दिन अमावस्या का पर्व मनाया जाता है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और पितरों की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही पवित्र नदी में स्नान, दान और जप-तप भी किया जाता है। मान्यता है कि अमावस्या पर इन शुभ कार्यों को करने से जातक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और पितृ देव प्रसन्न होते हैं। ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या के दिन किए जाने वाले चमत्कारी उपायों का वर्णन किया गया है, जिनको करने से इंसान का जीवन सुखमय होता है।
शनि अमावस्या के उपाय-
शनि अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाएं और इसकी 11 बार परिक्रमा लगाएं। इसके पश्चात घर की दक्षिण दिशा में एक मुट्ठी तिल को सरसों के तेल में भिगोकर रखें। ये दिशा पूर्वजों की दिशा मानी जाती है। मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से जातक को पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अगर आप भगवान शनि देव को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो शनि अमावस्या पर श्रद्धा अनुसार गरीब लोगों में अन्न और धन का दान करें। मान्यता है कि इस उपाय को करने से पितरों की कृपा बनी रहती है और पितृ दोष से छुटकारा मिलता है
शनि अमावस्या के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शनि देव की विधिपूर्वक पूजा करें और सच्चे मन से शनि स्त्रोत का पाठ करें। माना जाता है कि इस उपाय को करने से शनि साढ़े साती और ढैय्या का बुरा प्रभाव कम होता है।
शनि अमावस्या की तिथि और शुभ मुहूर्त-
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 05 जून को शाम 07 बजकर 54 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 06 जून को शाम 06 बजकर 07 मिनट पर होगा। सनातन धर्म में उदया तिथि का विशेष महत्व है। ऐसे में ज्येष्ठ माह शनि अमावस्या का पर्व 06 जून को मनाया जाएगा।
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चारधाम यात्रा : 14 दिनों में बना नया रिकॉर्ड, 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

देहरादून। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा की शुरुआत 10 मई से हुई और हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि यात्रा शुरू होने के 14 दिनों के भीतर ही 24 मई तक 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दर्शन कर लिए हैं।
अभी तक चारधाम यात्रा के लिए 31 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। साथ ही 24 मई तक 10 लाख श्रद्धालु धाम में दर्शन कर चुके हैं। 24 मई तक रिकॉर्ड 10 लाख 30 हजार 621 श्रद्धालु चारों धामों में दर्शन कर चुके हैं।
धामों में दर्शनों के लिए लगातार आती श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेश पर 31 मई तक ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन को बंद कर दिया गया है। उम्मीद की जा रही है कि 31 मई के बाद चारधाम यात्रा के लिए ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो सकता है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जो भी श्रद्धालु पिछले 7-8 दिनों से हरिद्वार या ऋषिकेश में चारधाम यात्रा के लिए ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के काउंटर के खुलने का इंतजार कर रहे हैं, लगभग 1,000 श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए रवाना किया जाए। उनके आदेश के बाद श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए रवाना भी किया जा रहा है। इसके साथ ही व्यवस्था को दुरुस्त रखने के भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, ताकि यात्रियों को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो।
अगर चारधाम यात्रा की बात करें तो यमुनोत्री धाम में 1,86,744, गंगोत्री धाम में 1,76,793, केदारनाथ धाम में 4,47,056 और बद्रीनाथ धाम में 2,20,028 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। सबसे ज्यादा केदारनाथ में 4 लाख 47 हजार 56 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए हैं। इन 14 दिनों में श्रद्धालुओं की मौत के आंकड़ों में भी वृद्धि हुई है। बताया गया है कि 14 दिनों में 52 श्रद्धालुओं की हार्टअटैक से मौत हुई है।
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आज का राशिफल, जानिए क्या कहते हैं आपके सितारे

हर किसी के जीवन में ग्रह नक्षत्र और राशि अहम भूमिका अदा करती है ज्योतिष अनुसार ग्रहों की चाल देखकर व्यक्ति के भविष्य का अनुमान लगाया जा सकता है ऐसे में आज हम आपके लिए लेकर आए हैं आज का राशिफल, तो जानिए क्या कहते हैं आपके सितारे।
मेष- किसी भी काम को शुरू करने से पहले गहनता से विचार करें आज का दिन आपके लिए बढ़िया बना रहेगा। आपको सभी कार्यों में सफलता हासिल हो सकती हैं माता पिता की सेहत को लेकर चिंता बनी रह सकती है।
वृषभ- नौकरी व कारोबार से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन मिलाजुला परिणाम लेकर आ रहा है परिवार में चल रही परेशानियां दूर हो सकती है। किसी धार्मिक कार्यक्रम में आप शामिल हो सकते हैं धन लाभ मिल सकता  है।
मिथुन- आज का दिन आपके लिए सामान्य बना रह सकता है आज आपकी मेहनत व्यर्थ नहीं जाएगी आपको सभी कार्यों में सफलता हासिल हो सकती है लंबी दूरी की यात्रा के योग बन रहे हैं काम काज की अधिकता रहेगी।
कर्क- कौशल प्रशिक्षण या सही ज्ञान आपको आगे लेकर जाने में मददगार सिद्ध हो सकते हैं माता पिता की सेहत को लेकर चिंता बनी रह सकती है जरूरी काम आपके आज पूरे हो सकते हैं।
सिंह- आर्थिक तौर पर बदलाव देखने को मिल सकता है परिवार में चल रही परेशानियां दूर हो सकती है माता पिता की सेहत को लेकर आज चिंता बनी रह सकती है सामाजिक कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
कन्या- आज आप किसी मुश्किल में फैंस सकते हैं और इससे बाहर निकलना आपके लिए मुश्किल हो सकता है। लंबी दूरी की यात्रा पूरी कर सकते हैं काम काज में आने वाली दिक्कतें दूर हो सकती है।
तुला- पारिवारिक जीवन आज आपका बढ़िया बना रह सकता है इस समय आप चिंतित है इसलिए कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय न लें। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों की तलाश आज पूरी हो सकती है।
वृश्चिक- किसी भी तरह के अवसाद से बचें और अपना पूरा ध्यान अपने काम की ओर लगाएं। अपने दिल की सुनें और अपनी खुशियों के मार्ग को स्वयं बनाएं। कारोबार में तरक्की के योग बन रहे हैं।
धनु- प्रेम जीवन जी रहे लोगों के लिए आज का दिन अच्छा होने वाला है प्रेमी के साथ डेट पर जाने का मौका मिल सकता है पारिवारिक जीवन आपका सामान्य बना रहेगा। काम काज की अधिकता बनी रहेगी।
मकर- कानूनी मामलों में सफलता आपको मिल सकती है आर्थिक तौर पर मजबूती बनी रहेगी। छोटी यात्रा का सुख आप प्राप्त कर सकते हैं पिता से अपने मन की बात आप शेयर कर सकते हैं।
कुंभ- अपने दिल की सुनें और अपनी खुशियों के मार्ग को स्वयं बनाएं। पारिवारिक जीवन में तनाव बना रह सकता है अपने शब्दों पर विराम लगाएं। वाहन सुख की प्राप्ति के योग बन रहे हैं मित्रों का सहयोग मिलेगा।
मीन- कारोबार और नौकरी दोनों में लेनदेन संबंधी गड़बड़ी से आपको हानि होगी। वैवाहिक जीवन में सुख शांति बनी रह सकती है ससुराल पक्ष से आपको धन लाभ की प्राप्ति हो सकती है काम काज में तेजी देखने को मिलेगी।
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विवाह संबंधित हर बाधा दूर करेगा "भौम प्रदोष" का उपाय

सनातन धर्म में कई सारे व्रत त्योहार पड़ते हैं और सभी का अपना महत्व भी होता है लेकिन भौम प्रदोष व्रत को खास माना गया है जो कि हर माह में आता है यह तिथि भगवान शिव की साधना आराधना को समर्पित होती है इस दिन भक्त भगवान शिव की विधि विधान से पूजा करते हैं और दिनभर उपवास भी रखते हैं
मान्यता है कि ऐसा करने से प्रभु की कृपा बरसती है। इस बार प्रदोष व्रत 4 जून दिन मंगलवार को किया जाएगा। मंगलवार के दिन प्रदोष पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष के नाम से जाना जा रहा है इस दिन शिव पार्वती की विधिवत पूजा करें साथ ही ​श्री शिव शंकर स्तोत्र का पाठ भक्ति भाव से करके अपनी प्रार्थना भगवान से कहें। माना जाता है कि इस उपाय को करने से विवाह की हर बाधा से छुटकारा मिलता है और शीघ्र विवाह के योग बनने लगते हैं।
श्री शिव शंकर स्तोत्र-
अतिभीषणकटुभाषणयमकिङ्किरपटली-
-कृतताडनपरिपीडनमरणागमसमये ।
उमया सह मम चेतसि यमशासन निवसन्
शिवशङ्कर शिवशङ्कर हर मे हर दुरितम् ॥ १ ॥
असदिन्द्रियविषयोदयसुखसात्कृतसुकृतेः
परदूषणपरिमोक्षण कृतपातकविकृतेः ।
शमनाननभवकानननिरतेर्भव शरणं
शिवशङ्कर शिवशङ्कर हर मे हर दुरितम् ॥ २ ॥
विषयाभिधबडिशायुधपिशितायितसुखतो
मकरायितगतिसंसृतिकृतसाहसविपदम् ।
परमालय परिपालय परितापितमनिशं
शिवशङ्कर शिवशङ्कर हर मे हर दुरितम् ॥ ३ ॥
दयिता मम दुहिता मम जननी मम जनको
मम कल्पितमतिसन्ततिमरुभूमिषु निरतम् ।
गिरिजासख जनितासुखवसतिं कुरु सुखिनं
शिवशङ्कर शिवशङ्कर हर मे हर दुरितम् ॥ ४ ॥
जनिनाशन मृतिमोचन शिवपूजननिरतेः
अभितोऽदृशमिदमीदृशमहमावह इति हा ।
गजकच्छपजनितश्रम विमलीकुरु सुमतिं
शिवशङ्कर शिवशङ्कर हर मे हर दुरितम् ॥ ५ ॥
त्वयि तिष्ठति सकलस्थितिकरुणात्मनि हृदये
वसुमार्गणकृपणेक्षणमनसा शिवविमुखम् ।
अकृताह्निकमसुपोषकमवताद्गिरिसुतया
शिवशङ्कर शिवशङ्कर हर मे हर दुरितम् ॥ ६ ॥
पितराविति सुखदाविति शिशुना कृतहृदयौ
शिवया हृतभयके हृदि जनितं तव सुकृतम् ।
इति मे शिव हृदयं भव भवतात्तव दयया
शिवशङ्कर शिवशङ्कर हर मे हर दुरितम् ॥ ७ ॥
शरणागतभरणाश्रित करुणामृतजलधे
शरणं तव चरणौ शिव मम संसृतिवसतेः ।
परिचिन्मय जगदामयभिषजे नतिरवतात्
शिवशङ्कर शिवशङ्कर हर मे हर दुरितम् ॥ ८ ॥
विविधाधिभिरतिभीतिभिरकृताधिकसुकृतं
शतकोटिषु नरकादिषु हतपातकविवशम् ।
मृड मामव सुकृतीभव शिवया सह कृपया
शिवशङ्कर शिवशङ्कर हर मे हर दुरितम् ॥ ९ ॥
कलिनाशन गरलाशन कमलासनविनुत
कमलापतिनयनार्चित करुणाकृतिचरण ।
करुणाकर मुनिसेवित भवसागरहरण
शिवशङ्कर शिवशङ्कर हर मे हर दुरितम् ॥ १० ॥
विजितेन्द्रियविबुधार्चित विमलाम्बुजचरण
भवनाशन भयनाशन भजिताङ्गितहृदय ।
फणिभूषण मुनिवेषण मदनान्तक शरणं
शिवशङ्कर शिवशङ्कर हर मे हर दुरितम् ॥ ११ ॥
त्रिपुरान्तक त्रिदशेश्वर त्रिगुणात्मक शम्भो
वृषवाहन विषदूषण पतितोद्धर शरणम् ।
कनकासन कनकाम्बर कलिनाशन शरणं
शिवशङ्कर शिवशङ्कर हर मे हर दुरितम् ॥ १२ ॥
इति श्री शिव शंकर स्तोत्र ॥
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वट सावित्री 21 जून को, महिलाएं रखेंगी पति की लंबी आयु के लिए व्रत

शादी के बाद नई नवेली दुल्हन ऐसे करें वट सावित्री की पूजा, इन बातों का रखें खास ध्यान, जानें पूरी विधि : हर सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री का व्रत काफी महत्वपूर्ण होता है. मान्यता है कि जो भी विवाहित महिलाएं वट सावित्री का व्रत रखती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. इस वर्ष 21 जून को वट सावित्री का व्रत है. इस बार नई नवेली दुल्हन जो पहली वार वट सावित्री का व्रत रखने जा रही हैं, उनके लिए व्रत रखने की विधि जानना बेहद जरूरी है. आपको बता दें कि वट सावित्री व्रत के दिन हर विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए उपवास रख विधि-विधान से पूजा करती हैं. इस साल सुहागिनों का पर्व वट सावित्री व्रत 21 जून 2024 को रखा जाएगा. ऐसे में अगर आप शादी के बाद पहली बार वट सावित्री का व्रत करने जा रही हैं, तो पूजा से जुड़े इन नियमों का विशेष रूप से पर ध्यान रखें.वहीं अगर कोई नई नवेली दुल्हन, जो पहली बार इस व्रत को रखने जा रही है, उन्हें सबसे सबसे पहले वट के पेड़ की आवश्यकता होगी. अगर वट वृक्ष आस-पास में नही है, तो कहीं से वट वृक्ष की टहनी घर लाकर स्थापित करना है. फिर दो टोकरियों में पूजा का सामान सजाकर रखना है. इसमें सावित्री और सत्यवान की मूर्ति, कलावा, बरगद का फल, धूप, दीपक, फूल, मिठाई, रोली, सवा मीटर का कपड़ा, बांस का पंखा, कच्चा सूत, इत्र, पान, सुपारी, नारियल, सिंदूर, अक्षत, सुहाग का सामान, भीगा चना, कलश, मूंगफली के दाने, मखाने का लावा जैसी चीजें शामिल होंगी.
नई दुल्हन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल रंग की साड़ी पहनें. बरगद के पेड़ के नीचे पूजा घर और पूजा स्थल को साफ करें. अशुद्धियों को दूर करने के लिए थोड़ा गंगाजल छिड़कें. अब सप्तधान्य को बांस की टोकरी में भरकर उसमें भगवान ब्रह्मा की मूर्ति स्थापित करें. दूसरी टोकरी में सप्तधान्य भरकर सावित्री और सत्यवान की मूर्ति स्थापित करें. इस टोकरी को पहली टोकरी के बाईं ओर रखें. अब इन दोनों टोकरियों को बरगद के पेड़ के नीचे रख दें.पेड़ पर चावल के आटे की छाप या पीठा लगाना होता है. पूजा के समय बरगद के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाया जाता है और इसके चारों ओर 7 बार पवित्र धागा लपेटा जाता है. इसके बाद वट वृक्ष की परिक्रमा की जाती है. पेड़ के पत्तों की माला बनाकर धारण किया जाता है, फिर वट सावित्री व्रत की कथा सुनकर चने से पकवान बनाया जाता है और सास को उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कुछ पैसे दिए जाते हैं. एक टोकरी में फल, अनाज, वस्त्र आदि रखे जाते हैं और किसी ब्राह्मण को दान किया जाता है.
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ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 21 जून को, करें श्री सत्यनारायण की पूजा

  • हर मुराद होगी पूरी
सनातन धर्म में गुरुवार के दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही गुरुवार का व्रत रखा जाता है। इस दिन श्री सत्यनारायण पूजा भी की जाती है। सनातन शास्त्रों में श्री सत्यनारायण पूजा की महिमा का वर्णन है। इस पूजा के लिए तिथि और मुहूर्त का विचार नहीं किया जाता है। साधक अपनी सुविधा के अनुसार किसी दिन श्री सत्यनारायण पूजा कर सकते हैं। हालांकि, पूर्णिमा तिथि पर श्री सत्यनारायण पूजा करने से व्रती को विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। धार्मिक मत है कि श्री सत्यनारायण पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली आती है। साथ ही व्रती को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। अगर आप भी जून महीने में श्री सत्यनारायण पूजा करने की सोच रहे हैं, तो तिथि और शुभ मुहूर्त अवश्य नोट कर लें। आइए जानते हैं-
शुभ मुहूर्त-
ज्योतिष पूर्णिमा तिथि पर श्री सत्यनारायण पूजा करने की सलाह देते हैं। जून महीने में ज्येष्ठ पूर्णिमा 22 जून है। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा 21 जून को सुबह 07 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 22 जून को सुबह 06 बजकर 37 मिनट पर समाप्त होगी। ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 21 जून को रखा जाएगा। वहीं, ज्येष्ठ पूर्णिमा 22 जून को मनाई जाएगी। अतः जून महीने में श्री सत्यनारायण पूजा हेतु 22 जून का दिन बेहद उत्तम है। इस दिन स्नान-ध्यान, पूजा, जप-तप और दान-पुण्य किया जाता है।
शुभ समय-
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 04 मिनट से 04 बजकर 44 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 43 मिनट से 03 बजकर 39 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 07 बजकर 21 मिनट से 07 बजकर 41 मिनट तक
निशिता मुहूर्त- रात्रि 12 बजकर 03 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक।
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कृषक दंपती ने सार्वजनिक मंदिर निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन की दान

  • किसान के सेवा भाव की सराहना की हो रही तारीफ
बलरामपुर। जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम राजेंद्रपुर में कृषक दंपती ने सार्वजनिक मंदिर निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन दान में दी है। बुधवार को ग्रामवासियों की उपस्थिति में शिव मंदिर निर्माण के लिए विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई। कृषक दंपती के सेवा भाव की सराहना हो रही है।
सामरी क्षेत्र के राजेंद्रपुर निवासी कृषक दंपती सोमरा-मूलपति नगेसिया की इच्छा थी कि उनकी जमीन पर शिव मंदिर का निर्माण हो, इसे लेकर वे गांव वालों से अक्सर चर्चा भी किया करते थे। गांव वालों को जब इस बात की जानकारी लगी तो उन्होंने कृषक दंपती से चर्चा की। कृषक दंपती ने अपनी भावनाओं से उन्हें अवगत कराया। गांव वालों ने भी यह तय किया कि कृषक दंपती की जमीन पर शिव मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। तब कृषक दंपति ने अपनी पांच एकड़ जमीन मंदिर निर्माण के लिए दान कर दी। ग्रामीण क्षेत्र में जमीन जायदाद को लेकर जहां विवाद की खबरें लगातार सामने आती है। यहां तक कि नाते-रिश्तेदार एक-दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं। सालों -साल न्यायालय में केस चलता है ऐसे कठिन दौर में कृषक दंपती का यह निर्णय प्रेरणादायक है। गांव के लोग उनके निर्णय की सराहना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि दंपती ने समाज को नया संदेश दिया है। राजेंद्रपुर सहित आसपास के गांव में रहने वाले लोग कृषक दंपती की सोच की सराहना कर रहे हैं। समरी व उसे लगा राजेंद्रपुर इलाका बॉक्साइट की खदानों के लिए जाना जाता है। यहां की जमीन बेशकीमती हैं। जमीन की मोह माया किए बगैर दंपती ने सार्वजनिक शिव मंदिर निर्माण के लिए पहल की।
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अमलेश्वर में 26 मई से 2 जून तक शिवपुराण कथा

  • पुलिस ने जारी की ट्रैफिक एडवाइजरी
दुर्ग। मशहूर कथावाचक सिहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा इन दिनों छत्तीसगढ़ में हैं। कुरूद में शिवपुराण कथा करने के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा के द्वारा दुर्ग के अमलेश्वर में शिवपुराण कथा का आयोजन किया जाएगा। शिव महापुराण कथा का आयोजन 26 मई से 2 जून तक होगा। इस कथा को लेकर आयोजन स्थल पर तैयारी भी जोरों से जारी है। यहां गर्मी को देखते हुए भक्तों की सुविधा के लिए खास तौर पर इंतजाम किए जा रहे हैं।
बताया गया कि इस प्रवचन को सुनने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचेंगे। लोगों को कथा स्थल तक पहुंचने के लिए परेशानी न हो और यातायात सुगम रहे, इसके लिए रायपुर पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। वहीं कथा स्थल तक आने-जाने के लिए मार्ग परिवर्तित किया गया है। पुलिस ने श्रद्धालुओं से अपील है कि, रायपुर से कथा स्थल पहुंचने के लिए भाठागांव चौक होते हुए काठाडीह मार्ग ​​​​​​​और खुड़मुड़ा नदी पुल से होकर अमलेश्वर कथा स्थल तक पहुंचे। इसी तरह टाटीबंध से कुम्हारी चौक, परसदा, मगरघटा होते हुए ग्राम भोथली और एम.टी. वर्कशॉप रोड का इस्तेमाल करते हुए कथा स्थल जाएं।
भीषण गर्मी में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कथा स्थल के आस-पास 7 से 8 जगहों पर बोर किया गया है। पानी की टंकी भी लगाई गई है, जहां पर पीने का पानी उपलब्ध रहेगा। इसके साथ ही तेज गर्मी को देखते हुए 2 लाख स्क्वायर फीट में शावर सिस्टम भी लगाया जाएगा। खासतौर पर इसके कारीगर इंदौर से बुलाए गए हैं।
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बुद्ध पूर्णिमा आज, जानिए...शुभ मुहूर्त

आज देशभर में बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार मनाया जा रहा है. बुद्ध पूर्णिमा मुख्य रूप से बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान गौतम बुद्ध को समर्पित है. सनानत धर्म की मान्यताओं के अनुसार, गौतम बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार माना गया है. वहीं, पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है. इसलिए भगवान भगवान विष्णु की विधिवत पूजा और चंद्रदेव को अर्घ्य देने से जीवन की हर बाधा को दूर किया जा सकता है.
बुद्ध पूर्णिमा 22 मई को देर रात 06 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन यानी 23 मई को शाम 07 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि को माना जाता है इसलिए आज 23 मई को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाएगी।
अगर आपकी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति अशुभ या कमजोर है तो बुद्ध पूर्णिमा पर इसे एक सरल उपाय से दूर किया जा सकता है. चन्द्रमा को मजबूत बनाने के लिए भगवान शिव की उपासना सबसे ज्यादा फलदायी होती है. इसलिए बुद्ध पूर्णिमा पर शिव मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें. चाहें तो पूर्णिमा का उपवास भी रख सकते हैं.
कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को मजबूत बनाने के लिए बुद्ध पूर्णिमा पर अंगुली में मोती धारण करें. इसे पहनने के बाद गरीब या जरूरतमंदों को दान जरूर करें. अंगुली में मोती धारण करने के लिए ज्योतिषविदों की सलाह जरूर लें.
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ज्येष्ठ माह की एकादशी 2 जून को, जानिए...शुभ मुहूर्त

सनातन धर्म में अपरा एकादशी को बहुत फलदायी माना जाता है। इस तिथि पर श्री हरि विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा होती है। यह ज्येष्ठ मास की पहली एकादशी है, जो 2 जून, 2024 को मनाई जाएगी। ऐसी मान्यता है कि जो साधक इस दिन का उपवास रखते हैं उन्हें धन-दौलत और पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है, तो आइए इस व्रत से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं -
ज्येष्ठ माह की एकादशी तिथि की शुरुआत 2 जून, 2024 सुबह 05 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगी। और इसका समापन अगले दिन 03 जून, 2024 मध्य रात्रि 02 बजकर 41 मिनट पर होगा। पंचांग को देखते हुए इस साल अपरा एकादशी 2 जून को मनाई जाएगी।
पूजा विधि-
व्रती सुबह उठकर स्नान करें।
भगवान श्री हरि के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद भगवान के कक्ष को अच्छी तरह साफ कर लें।
एक वेदी पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
भगवान का पंचामृत से स्नान करवाएं।
पीले फूलों की माला अर्पित करें।
हल्दी या फिर गोपी चंदन का तिलक लगाएं।
पंजीरी और पंचामृत का भोग लगाएं।
भगवान विष्णु का ध्यान करें।
पूजा में तुलसी पत्र अवश्य शामिल करें।
अंत में आरती करें।
पूजा में हुई गलतियों के लिए क्षमायाचना करें।
जरूरतमंदों को भोजन कराएं और उनकी मदद करें।
अगले दिन व्रती पारण समय में अपना व्रत खोलें।
श्री हरि पूजा मंत्र-
दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान। यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्‍टं च लभ्यते।।
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खाटू श्याम बाबा का व्रत किस, दिन यहाँ जानिए...सब कुछ

बाबा श्याम को कलयुग का अवतार माना जाता है। श्याम को हारे का सहारा भी कहा जाता है। हर साल लाखों भक्त बाबा श्याम के दरबार में शीश जलाने आते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि बाबा श्याम कौन हैं... और खाटूश्याम जी में बाबा श्याम का मंदिर क्यों बनाया गया है... जो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
महाभारत में उल्लेख है कि भीम के पुत्र घटोत्कच थे और उनके पुत्र बर्बरीक थे। बर्बरीक देवी माँ के भक्त थे। बर्बरीक की तपस्या और भक्ति से प्रसन्न होकर देवी माँ ने उन्हें तीन बाण दिये, जिनमें से एक से वह संपूर्ण पृथ्वी को नष्ट कर सकते थे। ऐसे में जब महाभारत का युद्ध चल रहा था तो बर्बरीक ने अपनी मां हिडिम्बा को युद्ध लड़ने का प्रस्ताव दिया. तब बर्बरीक की माँ ने सोचा कि कौरवों की सेना बड़ी है और पांडवों की सेना छोटी है, इसलिए शायद कौरव युद्ध में पांडवों पर भारी पड़ जायेंगे। तब हिडिम्बा ने कहा कि तुम हारने वाले पक्ष की ओर से लड़ोगे। इसके बाद माता की आज्ञा मानकर बर्बर लोग महाभारत के युद्ध में भाग लेने के लिए निकल पड़े। लेकिन, श्री कृष्ण जानते थे कि यदि बर्बरीक युद्ध स्थल पर पहुँच गए तो जीत पांडवों की होगी, वे कौरवों की ओर से युद्ध लड़ेंगे। इसलिए भगवान कृष्ण ने एक ब्राह्मण का रूप धारण किया और बर्बरीक के पास पहुंचे।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से उसका शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक ने दान स्वरूप अपना शीश बिना किसी प्रश्न के भगवान कृष्ण को दान कर दिया। इस दान के कारण श्री कृष्ण ने कहा कि कलयुग में तुम मेरे नाम से पूजे जाओगे, कलयुग में तुम श्याम के नाम से पूजे जाओगे, तुम कलयुग के अवतार कहलाओगे और हारे का सहारा बनोगे।
जब घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने अपना शीश भगवान श्री कृष्ण को दान में दे दिया, तो बर्बरीक ने महाभारत का युद्ध देखने की इच्छा व्यक्त की, तब श्री कृष्ण ने बर्बरीक का शीश एक ऊँचे स्थान पर रख दिया। तब बर्बरीक ने संपूर्ण महाभारत युद्ध देखा। युद्ध की समाप्ति के बाद भगवान कृष्ण ने बर्बरीक का सिर गर्भवती नदी में फेंक दिया। इस प्रकार बर्बरीक यानि बाबा श्याम का शीश गर्भवती नदी से खाटू (उस समय खाटुवांग शहर) में आ गया। आपको बता दें कि खाटूश्यामजी में गर्भवती नदी 1974 में लुप्त हो गई थी.
स्थानीय लोगों के अनुसार, पीपल के पेड़ के पास एक गाय प्रतिदिन अपने आप दूध देती थी, ऐसे में जब लोगों ने उस स्थान की खुदाई की तो वहां से बाबा श्याम का सिर निकला। बाबा श्याम का यह शीश फाल्गुन माह की ग्यारस को प्राप्त हुआ था इसलिए बाबा श्याम का जन्मोत्सव भी फाल्गुन माह की ग्यारस को मनाया जाता है। खुदाई के बाद ग्रामीणों ने बाबा श्याम का सिर चौहान वंश की नर्मदा देवी को सौंप दिया। इसके बाद नर्मदा देवी ने बाबा श्याम को गर्भ गृह में स्थापित कर दिया और जिस स्थान पर बाबा श्याम को खोदा गया था, वहां पर एक श्याम कुंड बनाया गया।
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एकदंत संकष्टी चतुर्थी 26 मई को, करें ये काम

  • मिलेगी कर्ज से मुक्ति
सनातन धर्म में कई सारे व्रत त्योहार पड़ते हैं और सभी का अपना महत्व भी होता है लेकिन एकदंत संकष्टी चतुर्थी को खास माना गया है जो कि भगवान श्री गणेश की साधना आराधना को समर्पित होती है इस दिन भक्त भगवान गणेश की विधिवत पूजा करते हैं और दिनभर उपवास भी रखते हैं माना जाता है कि ऐसा करने से प्रभु की कृपा बरसती है।
पंचांग के अनुसार हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। अभी वैशाख का महीना चल रहा है और इसके समापन के बाद ज्येष्ठ माह लग जाएगा। ज्येष्ठ माह की पहली चतुर्थी तिथि पर एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत पूजन किया जाता है जो कि इस साल 26 मई को पड़ रही है। इस दिन भगवान श्री गणेश की पूजा का विधान होता है माना जाता है कि एकदंत संकष्टी चतुर्थी पर अगर शिव पुत्र गणेश की उपासना व उपवास किया जाए तो प्रभु प्रसन्न हो जाते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं इस दिन पूजा पाठ के दौरान अगर भगवान श्री गणेश के प्रिय स्तोत्र का पाठ भक्ति भाव से किया जाए तो कर्ज की समस्या से मुक्ति मिलती है तो आज हम आपको लिए लेकर आए हैं गणेश स्तोत्र।
एकदंत संकष्टी चतुर्थी की पूजा का शुभ मुहूर्त-
हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 26 मई को सुबह 6 बजकर 6 मिनट पर हो जाएगा और इस तिथि का समापन अगले दिन यानी की 27 मई को सुबह 4 बजकर 53 मिनट पर होगा। ऐसे में एकदंत संकष्टी चतुर्थी का पर्व 26 मई को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा के लिए दिनभर उत्तम रहेगा। इस दौरान पूजा पाठ और व्रत करने से जीवन के दुखों का अंत हो जाता है और सुख समृद्धि व शांति प्राप्त होती है।
गणेश स्तोत्र
शृणु पुत्र महाभाग योगशान्तिप्रदायकम् ।
येन त्वं सर्वयोगज्ञो ब्रह्मभूतो भविष्यसि ॥
चित्तं पञ्चविधं प्रोक्तं क्षिप्तं मूढं महामते ।
विक्षिप्तं च तथैकाग्रं निरोधं भूमिसज्ञकम् ॥
तत्र प्रकाशकर्ताऽसौ चिन्तामणिहृदि स्थितः ।
साक्षाद्योगेश योगेज्ञैर्लभ्यते भूमिनाशनात् ॥
चित्तरूपा स्वयंबुद्धिश्चित्तभ्रान्तिकरी मता ।
सिद्धिर्माया गणेशस्य मायाखेलक उच्यते ॥
अतो गणेशमन्त्रेण गणेशं भज पुत्रक ।
तेन त्वं ब्रह्मभूतस्तं शन्तियोगमवापस्यसि ॥
इत्युक्त्वा गणराजस्य ददौ मन्त्रं तथारुणिः ।
एकाक्षरं स्वपुत्राय ध्यनादिभ्यः सुसंयुतम् ॥
तेन तं साधयति स्म गणेशं सर्वसिद्धिदम् ।
क्रमेण शान्तिमापन्नो योगिवन्द्योऽभवत्ततः ॥
सिद्धि प्राप्ति हेतु मंत्र
श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा ॥
धन लाभ हेतु मंत्र
ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।
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