वक्फ बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी कांग्रेस
04-Apr-2025 2:45:13 pm
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- कानूनी लड़ाई का किया ऐलान
नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी वक्फ बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी. कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने X पर एक पोस्ट में इसकी घोषणा की. बता दें कि एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके (DMK) पहले ही वक्फ संशोधन विधेयक की संवैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान कर चुकी है. वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 संसद से शुक्रवार को पारित हो गया. लोकसभा की मंजूरी मिलने के एक दिन बाद राज्यसभा में भी यह विधेयक 12 घंटे से अधिक की बहस के बाद पास हो गया. लोकसभा में बिल के पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े, वहीं राज्यसभा में समर्थन में 128 और विरोध में 95 वोट पड़े.
सीएए, 2019 को लेकर कांग्रेस की चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. आरटीआई अधिनियम, 2005 में 2019 के संशोधनों को लेकर कांग्रेस की चुनौती पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है. कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स (2024) में संशोधन की वैधता को लेकर कांग्रेस की चुनौती पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है. प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991 की मूल भावना को बनाए रखने के लिए कांग्रेस के हस्तक्षेप पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है. कांग्रेस बहुत जल्द ही वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 की संवैधानिकता को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी. हमें पूरा विश्वास है और हम भारत के संविधान में निहित सिद्धांतों, प्रावधानों और प्रक्रियाओं पर मोदी सरकार के सभी हमलों का विरोध करना जारी रखेंगे.'
संसद में विपक्षी नेताओं ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन करता है और उन्होंने इस विधेयक को लाने में सरकार की मंशा पर सवाल उठाया. कांग्रेस पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर अल्पसंख्यकों के प्रति नकारात्मक रुख अपनाने का आरोप लगाया. कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'सत्ता पक्ष ने बहुमत का दुरुपयोग किया है और विधेयक को जबरन थोपा गया है. अगर वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को चुनौती दी जाती है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि न्यायपालिका इसे असंवैधानिक घोषित कर सकती है.'
वक्फ विधेयक में वक्फ ट्रिब्यूनल को और मजबूत करने तथा एक निश्चित समयावधि में विवाद का समाधान सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है. विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, वक्फ बोर्डों में वक्फ संस्थाओं का अनिवार्य अंशदान 7 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि 1 लाख रुपये से अधिक आय वाली वक्फ संस्थाओं का ऑडिट किया जाएगा. एक सेंट्रलाइज पोर्टल के जरिए वक्फ संपत्तियों का कुशल प्रबंधन होगा. इस्लाम धर्म का पालन करने वाले लोग (कम से कम पांच साल के लिए) ही अपनी संपत्ति वक्फ बोर्ड को दान कर पाएंगे. वहीं, अगर कोई वादी किसी विवाद पर वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले से संतुष्ट नहीं है तो वह ऊपरी अदालतों ने इसे चुनौती दे सकेगा.