चैत्र नवरात्रि में मां कूष्मांडा की उपासना से मिलेगा दीर्घायु और यश
02-Apr-2025 3:28:53 pm
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Chaitra Navratri : नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा की पूजा के लिए शुभ माने जाते हैं। इस दौरान मां शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री माता तक की पूजा की जाती है। दुर्गा नवमी के दिन हवन और विसर्जन के साथ इसका समापन होता है। देवी भागवत पुराण के अनुसार मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठ हैं। नवरात्रि के दौरान भारत में स्थापित शक्तिपीठों के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। आइए जानते हैं मां दुर्गा के 9 शक्तिपीठों और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं के बारे में। नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। इस साल चैत्र नवरात्रि 06 अप्रैल को समाप्त होगी। यह नौ दिनों का त्योहार है जो दिलचस्प उत्सव अनुष्ठानों से भरा होता है। नवरात्रि देवी दुर्गा और उनके नौ अवतारों की पूजा के लिए समर्पित है। क्या आप जानते हैं कि साल में चार नवरात्रि होती हैं, लेकिन केवल दो शरद नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि ही बड़े पैमाने पर मनाई जाती हैं। व्रत के दौरान नौ दिनों तक मांस, अनाज, शराब, प्याज और लहसुन का सेवन वर्जित होता है।
शक्तिपीठ से जुड़ी कथा-
माता शक्तिपीठ से जुड़ी कथा का वर्णन पुराणों में भी मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के शव को लेकर धरती पर तांडव करने लगे थे। तब भगवान विष्णु ने शिव के क्रोध को शांत करने के लिए सुदर्शन चक्र से सती के शव के टुकड़े कर दिए। इस क्रम में जहां-जहां सती के शरीर के अंग और आभूषण गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए।
मां दुर्गा के 9 प्रमुख शक्तिपीठ-
1. कालीघाट मंदिर कोलकाता - चार उंगलियां गिरी
2. कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर - त्रिनेत्र गिरा
3. अंबाजी मंदिर गुजरात - हृदय गिरा
4. नैना देवी मंदिर - आंखें गिरना
5. कामाख्या देवी मंदिर - यहां गुप्तांग गिरे
6. हरसिद्धि माता मंदिर उज्जैन - यहां बायां हाथ और होंठ गिरे
7. ज्वाला देवी मंदिर - सती की जीभ गिरी
8. कालीघाट में मां के बाएं पैर का अंगूठा गिरा।
9. वाराणसी - उत्तर प्रदेश के काशी में मणिकर्णिक घाट पर विशालाक्षी की मां की माला गिरी।
पूजा का महत्व और लाभ-
मां कुष्मांडा की उपासना से भक्तों के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। मान्यता है कि उनकी कृपा से सभी प्रकार के रोगों का नाश होता है और व्यक्ति को आरोग्यता की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से देवी की उपासना करने से दीघार्यु, यश और कीर्ति की प्राप्ति होती है। इस दिन भक्त मां को सफेद वस्त्र, सफेद फूल और कद्दू का भोग अर्पितकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
अष्टमी और नवमी कब है-
इस बार चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी और महानवमी का संयोग देखने को मिल रहा है, क्योंकि इस बार पंचमी तिथि क्षय हो रही है। ऐसे में 8 दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। इस प्रकार 5 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि की पूजा की जाएगी और उसी दिन कन्या पूजन भी किया जाएगा. इसके साथ ही अगले दिन यानी 6 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि की पूजा और राम नवमी का त्योहार मनाया जाएगा।