दुनिया-जगत

भारतीय मूल की महिला के साथ ट्रेन में नस्लीय दुर्व्यवहार

  • नशे में धुत शख्स बोला - हमने भारत को जीता...
लंदन। ब्रिटेन की एक ट्रेन में कथित नस्लीय दुर्व्यवहार का एक और मामला सामने आया है। आरोप है कि 26 वर्षीय भारतीय मूल की महिला के साथ नशे में धुत एक शख्स ने क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया। इस घटना से सार्वजनिक स्थानों पर हेट स्पीच को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
यह घटना रविवार को उस समय हुई जब महिला, लंदन से मैनचेस्टर जा रही थीं। एक सहयात्री के साथ अनौपचारिक बातचीत के दौरान, उन्होंने आप्रवासियों का समर्थन करने वाले एक संगठन के साथ अपने काम का जिक्र किया।
ऐसा लगता है कि दोनों की बातचीत से एक अन्य यात्री भड़क गया। यह शख्स एक कैन से शराब पी रहा था और नस्लीय टिप्पणी करने लगा। घटना के एक वीडियो, जिसे बाद में हटा दिया गया], में यह व्यक्ति, भारतीय मूल की महिला और अन्य यात्रियों पर नस्लवादी टिप्पणी करते हुए नजर आया। वह इंग्लैंड के औपनिवेशिक अतीत के बारे में शेखी बघार रहा था। उसने कहा, "आप इंग्लैंड में हैं और आप कुछ दावा कर रहे हैं। यदि आप कुछ दावा नहीं कर रहे होते तो आप इंग्लैंड में नहीं होते। अंग्रेजों ने दुनिया पर विजय प्राप्त की और इसे आपको वापस दे दिया। हमने भारत पर विजय प्राप्त की, हम इसे नहीं चाहते थे, हमने इसे आपको वापस दे दिया।"
महिला ने उस घटना को याद करते हुए कहा, "उस व्यक्ति ने 'आप्रवासी' शब्द सुना और उसकी तत्काल प्रतिक्रिया क्रोध और आक्रमक थी। यह बहुत ही परेशान करने वाला था। मुझे लगा कि उसने जो कहा वह गलत था। यह एक पागलपन भरी स्थिति थी। मैंने अपनी सुरक्षा के लिए इसे रिकॉर्ड कर लिया।"
वीडियो को ऑनलाइन पोस्ट करने के बाद, महिला ने पाया कि उन्हें गालियों की बौछार का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "इस एक वीडियो से मुझे जितनी नफरती मिली है, वह पागलपन है। ऐसे अपशब्द कहे गए, जिनके बारे में मुझे पता भी नहीं था। हिंसक बयानबाजी और नफरत भरी बातें अब एक्स पर इतनी आसानी से फैल सकती हैं। मैं इस देश में रंग-बिरंगे लोगों के अधिकारों के बारे में गहराई से सोचती हूं, और मुझे लगता है कि हम पीछे हट रहे हैं।"
भारतीय मूल की महिला ने इस घटना की रिपोर्ट ब्रिटिश ट्रांसपोर्ट पुलिस (बीटीपी) को दी है। उन्होंने अपनी विरासत पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा, "भारतीय होना, एक अप्रवासी की बेटी होना, अपने इतिहास और विरासत से जुड़े रहना एक वरदान है। मैं अपने लिए और रंग-बिरंगे लोगों के लिए खड़ी होती हूं, और मैं सभी का पूरा समर्थन करती हूं।"
यह घटना अवंती वेस्ट कोस्ट ट्रेन में एक अन्य नस्लवादी टकराव के कुछ ही दिनों बाद हुई, जहां एक महिला ने नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) के डेंटिस्ट से कहा था कि 'अपने देश वापस जाओ।' घटना के एक वीडियो में महिला को एनएचएस डेंटिस्ट पर नस्लवादी टिप्पणी करते हुए नजर आई। महिला साथी यात्री को 'मोरक्को या ट्यूनीशिया वापस जाने' के लिए कह रही थी। इन लगातार घटनाओं ने यू.के. में सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ती असहिष्णुता और नस्लीय दुर्व्यवहार के बारे में नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं।
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फ्रांस के विदेश मंत्री से की मुलाकात

  • एआई और इनोवेशन पर की चर्चा
पेरिस। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को पेरिस में अपने फ्रांसीसी समकक्ष जीन-नोएल बैरोट से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), इनोवेशन, कनेक्टिविटी और स्वच्छ ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत-फ्रांस द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की। जयशंकर ने बैठक का ब्योरा शेयर करते हुए कहा, "आज शाम पेरिस में विदेश मंत्री जीन-नोएल बरोट से मिलकर खुशी हुई। एआई और इनोवेशन, कनेक्टिविटी और स्वच्छ ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करते हुए हमारे व्यापक सहयोग पर चर्चा हुई। क्षेत्रीय और वैश्विक विकास के बारे में भी बात हुईं।"
फ्रांसीसी विदेश मंत्री ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, 'भारत के साथ, एआई हमारी रणनीतिक साझेदारी का नया क्षेत्र है। 2026 में, हम मिलकर इनोवेशन का एक फ्रेंको-भारतीय वर्ष लिखेंगे!' यह बैठक पेरिस में एआई शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत रात्रिभोज के दौरान हुई।
प्रधानमंत्री मोदी अपने दो देशों के दौरे के पहले चरण के तहत सोमवार को फ्रांस पहुंचे. फ्रांस के बाद पीएम मोदी संयुक्त राज्य अमेरिका जाएंगे। अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान, वे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एआई एक्शन शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे, द्विपक्षीय चर्चा करेंगे और व्यापार जगत के नेताओं को संबोधित करेंगे। पेरिस पहुंचने पर, उनका भारतीय प्रवासियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया।
शाम को, पेरिस के एलीसी पैलेस में आयोजित रात्रिभोज में राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया, जहां दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से मित्रतापूर्ण तरीके से गले मिलकर अभिवादन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, "पेरिस में अपने मित्र राष्ट्रपति मैक्रों से मिलकर बहुत खुशी हुई।" रात्रिभोज के दौरान प्रधानमंत्री ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस से भी मुलाकात की, जो एआई शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए फ्रांस में हैं। यह पीएम मोदी की फ्रांस की छठी यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की बढ़ती गहराई को दिखाती है।
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भारत विकास और पर्यावरण दोनों को समृद्ध करने के लिए प्रतिबद्ध : PM मोदी

  • प्रधानमंत्री ने फ्रांस की दो दिवसीय यात्रा के दौरान वर्चुअली ‘इंडिया एनर्जी वीक 2025’ को किया संबोधित
पेरिस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस की दो दिवसीय यात्रा के दौरान वर्चुअली ‘इंडिया एनर्जी वीक 2025’ को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी भारत की सदी है। भारत केवल अपनी नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की विकास यात्रा को गति दे रहा है, और इसमें ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा महत्वाकांक्षाएं पांच स्तंभों पर आधारित हैं। संसाधनों का कुशल दोहन, नवाचार को बढ़ावा, मजबूत अर्थव्यवस्था और स्थिर राजनीतिक स्थिति, रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और वैश्विक स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता जोड़ने, भारतीय रेलवे को नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन की ओर ले जाने और हर साल 50 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रख रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये लक्ष्य महत्वाकांक्षी लग सकते हैं, लेकिन पिछले 10 वर्षों में भारत ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे इन लक्ष्यों को प्राप्त करने की क्षमता को दर्शाती हैं। प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने पिछले 10 वर्षों में दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का सफर तय किया है। भारत की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता 32 गुना बढ़ी है, जिससे देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक बन गया है। गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता भी तीन गुना बढ़ी है।
मोदी ने कहा कि भारत पेरिस समझौते के लक्ष्यों को समय से पहले पूरा करने वाला पहला जी-20 देश है। उन्होंने इथेनॉल सम्मिश्रण की सफलता को रेखांकित करते हुए कहा कि आज भारत में 19 प्रतिशत इथेनॉल सम्मिश्रण किया जा रहा है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, किसानों की आय बढ़ी है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है। भारत अक्टूबर 2025 से पहले 20 प्रतिशत इथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लेगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत के नेतृत्व में बने ‘ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस’ से 28 देश और 12 अंतरराष्ट्रीय संगठन जुड़ चुके हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपने हाइड्रोकार्बन संसाधनों की संभावनाओं को पूरी तरह से तलाशने के लिए सुधार कर रहा है। बड़ी खोजों और गैस बुनियादी ढांचे के विस्तार के कारण भारत का गैस क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब है और सरकार इसे 20 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए प्रयासरत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की तलछटी घाटियों (सेडीमेंटरी बेसिन) में कई हाइड्रोकार्बन संसाधन हैं, जिनमें से कुछ की खोज हो चुकी है और कुछ की खोज बाकी है। सरकार ने ‘ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी’ बनाई है, जिससे अपस्ट्रीम सेक्टर अधिक आकर्षक हुआ है। सरकार ने समुद्री क्षेत्र में तेल और गैस संसाधनों की खोज, उत्पादन और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाए रखने के लिए कई नीतिगत सुधार किए हैं।
मोदी ने कहा कि भारत में पाइपलाइन बुनियादी ढांचे में वृद्धि के कारण प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ रही है और भविष्य में इसका उपयोग और बढ़ेगा। उन्होंने निवेशकों को ऊर्जा क्षेत्र में अपार संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि ‘मेक इन इंडिया’ और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देने के तहत भारत में फोटोवोल्टिक (पीवी) मॉड्यूल और अन्य हार्डवेयर के निर्माण की विशाल संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सौर पीवी मॉड्यूल निर्माण क्षमता पिछले दस वर्षों में 2 गीगावॉट से बढ़कर 70 गीगावॉट हो गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बैटरियों और ऊर्जा भंडारण क्षमता के क्षेत्र में नवाचार और निर्माण की विशाल संभावनाएं हैं। भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर तेजी से बढ़ रहा है, और बैटरियों की मांग को पूरा करने के लिए ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में तेजी से काम करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के बजट में ग्रीन एनर्जी को समर्थन देने के लिए कई घोषणाएं की गई हैं। सरकार ने ईवी और मोबाइल फोन बैटरियों के निर्माण से जुड़ी कई सामग्रियों को बेसिक कस्टम ड्यूटी से मुक्त कर दिया है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
पीएम मोदी ने ‘राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत में एक सशक्त आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार गैर-लिथियम बैटरी पारिस्थिकी तंत्र को भी बढ़ावा दे रही है और इस साल के बजट में न्यूक्लियर ऊर्जा क्षेत्र को भी निजी निवेश के लिए खोला गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में हर निवेश युवाओं के लिए नई नौकरियां पैदा कर रहा है और ग्रीन जॉब्स के अवसर बना रहा है। सरकार जनता को ऊर्जा क्षेत्र से जोड़कर इसे और मजबूत बना रही है। उन्होंने ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सौर क्षेत्र में नई स्किल्स विकसित हो रही हैं, नया सेवा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हो रहा है और निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ऐसे ऊर्जा समाधान देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो देश की विकास यात्रा को ऊर्जा प्रदान करें और पर्यावरण को भी समृद्ध करें। ‘इंडिया एनर्जी वीक’ इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल करेगा और दुनिया भर के निवेशक भारत में उभरते अवसरों का लाभ उठाएंगे।

 

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PM मोदी ने अमेरिकी चुनाव में जीत के लिए जेडी वेंस को दी बधाई

पेरिस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित राजकीय रात्रिभोज के दौरान अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की। यह मुलाकात वाशिंगटन की उनकी आगामी यात्रा से पहले ट्रंप प्रशासन के शीर्ष नेतृत्व के साथ पहली बातचीत थी।
इस दौरान पीएम मोदी ने जेडी वेंस को उनकी चुनावी जीत पर बधाई दी और उनसे गर्मजोशी से हाथ मिलाते हुए कहा, “बधाई हो। शानदार जीत।” प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बातचीत की तस्वीरें साझा की और बताया कि पीएम मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों और अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस के साथ महत्वपूर्ण चर्चा की।
फ्रांस की अपनी यात्रा पूरी करने के बाद पीएम मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर वाशिंगटन जाएंगे। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करना है। अपने अमेरिका दौरे से पहले, पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप के पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उनके साथ भारत-अमेरिका की साझेदारी को मजबूत करने में हुए सहयोग को याद किया। उन्होंने कहा कि यह उनकी ट्रंप के साथ पहली मुलाकात होगी, लेकिन उन्हें उनके पहले कार्यकाल में साथ मिलकर काम करने की अच्छी यादें हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि यह यात्रा भारत-अमेरिका के बीच साझेदारी को और मजबूत करने और व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का अवसर होगी। अमेरिका में हाल ही में कुछ नीतिगत बदलाव हुए हैं, जिनका प्रभाव भारतीय नागरिकों पर भी पड़ सकता है। इनमें वीजा और प्रवास से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। पीएम मोदी और ट्रंप के बीच इन मामलों पर भी चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा, व्यापार नीतियों, रक्षा सहयोग और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर भी बातचीत होगी।
पिछले महीने पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें ट्रंप ने भारत से अमेरिका की रक्षा खरीद बढ़ाने और व्यापार संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया था। दोनों नेताओं ने क्वाड गठबंधन और अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की थी। वाशिंगटन रवाना होने से पहले पीएम मोदी फ्रांस में राष्ट्रपति मैक्रों के साथ एआई एक्शन समिट की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस सम्मेलन में वैश्विक नेता और उद्योग विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सार्वजनिक उपयोग और उसके प्रभावों पर चर्चा करेंगे।
इसके अलावा, पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों फ्रांस के मार्सिले शहर में भारत के पहले वाणिज्य दूतावास का उद्घाटन करेंगे। इससे भारत-फ्रांस के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध और मजबूत होंगे। पीएम मोदी की यह यात्रा भारत की वैश्विक भागीदारी को और विस्तार देने और अमेरिका तथा फ्रांस के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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PM मोदी के पेरिस आगमन पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने खुशी व्यक्त की

  • बोले- ‘पेरिस में आपका स्वागत, मेरे दोस्त’
पेरिस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेरिस आगमन पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने खुशी व्यक्त की। इस संबंध में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। पोस्ट में उन्होंने लिखा, “पेरिस में आपका स्वागत है, मेरे दोस्त नरेंद्र मोदी। आपसे मिलकर अच्छा लगा। एआई एक्शन समिट के लिए हमारे सभी भागीदारों का स्वागत है। चलिए अब काम पर लगते हैं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एआई सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पेरिस पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेरिस एयरपोर्ट पर पहुंचे ही उनका भव्य स्वागत किया गया। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एक्शन समिट 2025 के तीसरे संस्करण की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस एआई सम्मेलन का आयोजन 11 फरवरी को ग्रैंड पैलेस में किया जाएगा। इससे पहले इस तरह का सम्मेलन ब्रिटेन और साउथ अफ्रीका में भी किया जा चुका है। फ्रांस सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्मान देने के लिए एलिसी पैलेस में रात्रिभोज का भी आयोजन किया था। एलिसी पैलेस में पहुंचते ही फ्रांस के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन के दौरान शीर्ष नेतृत्व के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा करेंगे। इस खास मौके पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी नया आकार देने की रूपरेखा निर्धारित की जाएगी। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा का महत्व फ्रांस द्वारा गर्मजोशी से स्वागत से साफ झलकता है। हवाई अड्डे पर फ्रांस के सशस्त्र बल मंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने उनका स्वागत किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ट्विटर पर जानकारी देते हुए बताया कि पीएम मोदी पेरिस पहुंचे, जहां उन्हें विशेष सम्मान मिला। यह यात्रा भारत-फ्रांस के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है। इसके तहत 'होराइजन 2047' रोडमैप पर प्रगति की समीक्षा की जाएगी, जो भारत और फ्रांस के बीच दीर्घकालिक सहयोग पर आधारित एक पहल है।
प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ मार्सिले जाएंगे, जहां वे अंतर्राष्ट्रीय थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर परियोजना का दौरा करेंगे। यह परियोजना परमाणु संलयन अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सहयोग है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी मजारगुएस युद्ध कब्रिस्तान भी जाएंगे, जहां वह विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
फ्रांस में कार्यक्रमों के बाद, पीएम मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका जाएंगे। इस यात्रा का उद्देश्य प्रौद्योगिकी, रक्षा और आर्थिक विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के संबंधों को और मजबूत करना है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमास को दी चेतावनी

  • कहा- "बंधकों की रिहाई नहीं तो मचेगी तबाही"
अमेरिका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि हमास को शनिवार दोपहर तक बंधक बनाए गए सभी लोगों को रिहा कर देना चाहिए। अगर फिलिस्तीनी ग्रुप ऐसा नहीं करता है तो वह इजरायल-हमास युद्धविराम को रद्द करने का प्रस्ताव रखेंगे। ओवल ऑफिस में पत्रकारों के साथ विस्तृत चर्चा में ट्रंप ने 8 जनवरी को हमास द्वारा रिहा किए गए तीन बंधकों की कमजोर शारीरिक हालत और फिलिस्तीनी ग्रुप की तरफ से बंधकों की रिहाई रोकने की घोषणा पर निराशा व्यक्त की।
बता दें गाजा युद्धविराम समझौते के तहत हमास को इजरायली बंधकों को रिहा करना है जिसके बदले में इजरायल फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ेगा। अब तक पांच बार बंधकों-कैदियों की अदला-बदली हो चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "जहां तक ​​मेरा सवाल है, अगर शनिवार 12 बजे तक सभी बंधकों को वापस नहीं लौटाया जाता है, तो मैं कहूंगा कि इसे रद्द कर दिया जाए और सभी दांव बंद कर दिए जाएं और तबाही मचने दी जाए। उन्हें शनिवार 12 बजे तक बंधकों को वापस लौटा दिया जाना चाहिए।"
ट्रंप ने कहा कि वे चाहते हैं कि बंधकों को एक साथ रिहा किया जाए, न कि कुछ को एक बार में, 'हम चाहते हैं कि सभी वापस आ जाएं।' ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर जॉर्डन और मिस्र गाजा से हटाए जाने वाले फिलिस्तीनी शरणार्थियों को नहीं लेंगे तो वे उन्हें दी जाने वाली सहायता रोक सकते हैं। वह मंगलवार को जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला से मिलने वाले हैं।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ट्रंप के इस प्रस्ताव पर कुछ असमंजस की स्थिति है कि एक बार लड़ाई बंद हो जाने के बाद गाजा पर अमेरिका का कब्जा हो जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके प्रस्ताव के तहत फिलिस्तीनियों को गाजा पट्टी पर वापस लौटने का अधिकार नहीं होगा। इस तरह उन्होंने अपने ही अधिकारियों के उस बयान का खंडन किया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि गाजा के लोगों को केवल अस्थायी रूप से ही हटाया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि वह विस्थापित फिलिस्तीनियों को लेने के लिए जॉर्डन और मिस्र के साथ एक समझौता कर सकते हैं, उन्होंने कहा कि अमेरिका दोनों देशों को 'सालाना अरबों डॉलर' देता है।
यह पूछे जाने पर कि क्या फिलिस्तीनियों को गाजा में वापस लौटने का अधिकार होगा, ट्रंप ने कहा: “नहीं, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि उन्हें बेहतर आवास मिलेगा।” उन्होंने कहा, “मैं उनके लिए एक स्थायी स्थान बनाने की बात कर रहा हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि गाजा को फिर से रहने लायक बनाने में कई साल लगेंगे। बता दें 4 जनवरी को वाशिंगटन में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना 'गाजा प्लान' पेश किया। ट्रंप ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका युद्ध से तबाह गाजा पट्टी पर कब्जा करेगा और फिलिस्तीनियों को कहीं और बसाए जाने के बाद इसे आर्थिक रूप से विकसित करेगा। उन्होंने गाजा का विकास करने का प्रस्ताव रखते वक्त यह स्पष्ट कहा था कि फिलिस्तीनियों का विस्थापन स्थायी होगा। हालांकि बाद में व्हाइट हाउस में इस पर सफाई दी थी कि गाजा से कोई भी विस्थापन अस्थायी होगा। हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमला करके 251 बंधकों को पकड़ लिया और लगभग 1,200 लोगों को मार डाला था जिसके बाद युद्ध शुरू हो गया।
गाजा के हमास द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायल के हमले में कम से कम 48,208 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इजरायल के हमलों से गाजा की लगभग दो-तिहाई इमारतें क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गई हैं।

 

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आईएमएफ की तकनीकी टीम का पाकिस्तान दौरा

  • 6 महत्वपूर्ण संस्थानों के कामकाज की करेगी समीक्षा
इस्लामाबाद। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पाकिस्तान के न्यायिक और नियामक तंत्र की समीक्षा कर रहा है यह कदम पाकिस्तान के सात अरब डॉलर के ऋण कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका मकसद भ्रष्टाचार और शासन से जुड़ी समस्याओं को हल करना है। संघीय शहबाज शरीफ सरकार ने सोमवार को यह जानकारी दी।
देश के वित्त मंत्रालय ने रविवार को बताया कि आईएमएफ की एक तकनीकी टीम एक सप्ताह के लिए पाकिस्तान आई है, ताकि वह शासन से जुड़े छह प्रमुख क्षेत्रों और संस्थाओं की जांच कर सके। 'डॉन' अखबार की खबर के मुताबिक, पाकिस्तान ने अक्तूबर 2023 में आईएमएफ के साथ एक समझौता किया था, जिसमें उसने भ्रष्टाचार से निपटने, समावेशी विकास को बढ़ावा देने और व्यवसायों व निवेश के लिए एक समान प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाने के लिए संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने का वादा किया था।
मंत्रालय ने बताया कि इसके लिए एक पैमाना बनाया गया है, जिसके तहत जुलाई 2025 तक 'शासन एवं भ्रष्टाचार निदान मूल्यांकन' (जीसीडीए) रिपोर्ट प्रकाशित की जाएगी। इस रिपोर्ट में पाकिस्तान की शासन व्यवस्था और भ्रष्टाचार से जुड़ी समस्याओं का विश्लेषण किया जाएगा और भविष्य में सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदमों की पहचान की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, यह मिशन पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष अधिकारियों, वित्त, राजस्व और चुनाव आयोग के प्रमुख के साथ भी बातचीत करेगा, ताकि इन संस्थाओं की कामकाजी प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा सके।
मिशन पाकिस्तान के छह महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों के कामों की समीक्षा करेगा, जिनमें वित्तीय व्यवस्था, केंद्रीय बैंक की कार्यप्रणाली, वित्तीय क्षेत्र की निगरानी, बाजार नियमन, कानून का शासन, धनशोधन और आतंकवाद-रोधी वित्तीय कार्रवाई शामिल हैं। आईएमएफ की टीम वित्त मंत्रालय, संघीय राजस्व बोर्ड, पाकिस्तान स्टेट बैंक, पाकिस्तान के ऑडिटर जनरल, पाकिस्तान चुनाव आयोग, कानून और न्याय मंत्रालय के साथ बैठक करेगी। 
 
 
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स्टील और एल्युमीनियम आयात पर 25 फीसदी टैरिफ लगाएंगे ट्रंप

  • जानिए...भारत पर होगा क्या असर?
न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि वह सभी प्रकार के इस्पात और एल्युमीनियम आयात पर 25 फीसदी शुल्क लगाएंगे। इस्पात और एल्युमीनियम का व्यापार भारत और अमेरिका के बीचकी लंबे समय से विवादास्पद रहा है।
टैरिफ का मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन यात्रा पर जा रहे हैं। वह 12 से 14 फरवरी तक अमेरिका में रहेंगे। सुपरबोल के लिए न्यू ऑरलियन्स जाते समय ट्रंप ने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका में आने वाले किसी भी स्टील पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगेगा, एल्युमीनियम पर भी।" उन्होंने कहा कि टैरिफ की घोषणा सोमवार को की जाएगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि सभी देशों के लिए पारस्परिक टैरिफ भी लगाए जाएंगे। पारस्परिक टैरिफ यानी जो देश अमेरिकी सामानों पर जितना टैरिफ लगाएगा, अमेरिका भी उस देश से आने वाले सामानों पर उतना ही टैरिफ लगाएगा। ट्रंप ने कहा, "बहुत सरल शब्दों में, अगर वे हमसे शुल्क लेते हैं, तो हम उनसे शुल्क लेंगे।" भारत ने 2023 के दौरान 4 बिलियन डॉलर का इस्पात और 1.1 बिलियन डॉलर का एल्युमीनियम निर्यात किया था। इस्पात और एल्युमीनियम बिजनेस भारत और अमेरिका के लिए एक विवादास्पद और जटिल मुद्दा रहा है। वाशिंगटन ने नई दिल्ली पर इन निर्यातों को सब्सिडी देने का आरोप लगाया है।
2023 में पीएम मोदी की वाशिंगटन यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने विश्व व्यापार संगठन के समक्ष धातुओं से जुड़े छह विवादों को निपटाने पर सहमति जताई। हालांकि, अक्टूबर में, अमेरिका ने एल्युमीनियम आयात की कुछ श्रेणियों पर 39.5% तक शुल्क लगाया। जनवरी में पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन के अंतिम दिनों में], ट्रंप के पहले प्रशासन की तरफ से लगाए गए 10 से 25 प्रतिशत के बीच के अतिरिक्त टैरिफ को माफ करने पर सहमति जताई थी। बदले में, भारत सेब, अखरोट और बादाम पर टैरिफ कम करने पर सहमत हुआ।
अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के अनुसार, पिछले साल भारत का अमेरिका को कुल निर्यात 87.4 बिलियन डॉलर था, जबकि अमेरिका से आयात 47.8 बिलियन डॉलर था। ट्रंप ने अमेरिकी व्यापार घाटे पर ध्यान केंद्रित किया है और टैरिफ के माध्यम से इसे कम करने की बात कही है।
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ग्रीक विदेश मंत्री ने भारत यात्रा के दौरान जयशंकर के साथ द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की

  • IMEC कॉरिडोर पर चर्चा की : विदेश मंत्रालय
नई दिल्ली। ग्रीक विदेश मंत्री जॉर्ज गेरापेट्राइटिस ने अपनी हाल की भारत यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण आयाम की समीक्षा की।
उन्होंने भारत-मध्य-पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) और इंडो-पैसिफिक और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में विकास के बारे में भी चर्चा की। विदेश मंत्री जॉर्ज गेरापेट्राइटिस ने विदेश मंत्री जयशंकर के निमंत्रण पर 5-7 फ़रवरी तक भारत का दौरा किया।
विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा, "मंत्रियों ने इंडो-पैसिफिक और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों सहित क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने यह भी विचार साझा किया कि IMEC कनेक्टिविटी को और मज़बूत करेगा।" अपनी बैठक के दौरान, जयशंकर ने ग्रीस को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (2025-26) की अस्थायी सदस्यता ग्रहण करने पर बधाई दी।
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, मंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों के पूरे स्पेक्ट्रम और अगस्त 2023 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की ग्रीस की आधिकारिक यात्रा और फरवरी 2024 में प्रधान मंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस की भारत की राजकीय यात्रा के बाद से द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी के तहत विभिन्न चल रही गतिविधियों पर हुई प्रगति की समीक्षा की।
मंत्रियों ने मजबूत आर्थिक संबंधों के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा को दोगुना करने के लिए दोनों प्रधानमंत्रियों के निर्देशों को भी याद किया। इस संदर्भ में, उन्होंने व्यापार और निवेश संबंधों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में संयुक्त आर्थिक समिति जैसे संस्थागत तंत्र के महत्व पर जोर दिया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, "मंत्रियों ने रक्षा सहयोग के ढांचे के तहत हासिल की गई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।" इसके अलावा, मंत्रियों ने अंतर्राष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की और समुद्री सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय शांति और स्थिरता के लिए संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और नौवहन की स्वतंत्रता के प्रति सम्मान जताया। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच कार्यबल की नियमित गतिशीलता को बढ़ावा देने के आर्थिक लाभों को भी पहचाना और प्रवासन और गतिशीलता भागीदारी समझौते के शीघ्र समापन के लिए काम करने पर सहमति व्यक्त की। मंत्रियों ने इस वर्ष दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ का उल्लेख किया। नई दिल्ली और एथेंस दोनों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की जाएगी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ग्रीक विदेश मंत्री ने यात्रा के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की। (एएनआई)
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अमेरिका में फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे

लॉस एंजेलिस। अमेरिका में फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे कुछ स्कूलों को कक्षाएं रद्द करनी पड़ी हैं या ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करनी पड़ी है। अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीएस) के अनुसार, इस मौसम में अब तक कम से कम 2.4 करोड़ लोग फ्लू से बीमार हो चुके हैं, 3.1 लाख लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है और 13,000 लोगों की मौत हो चुकी है।
सीडीएस का कहना है कि देशभर में फ्लू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 1 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह में 10 बच्चों की मौत हुई, जिससे इस सीजन में मरने वाले बच्चों की संख्या 57 हो गई है। इस हफ्ते 48,000 से ज्यादा मरीजों को फ्लू के कारण अस्पताल में भर्ती किया गया। सीडीएस के अनुसार, इस हफ्ते अमेरिका में एक व्यक्ति में इन्फ्लूएंजा ए (एच1एन2) वायरस का मामला सामने आया, जो इस सीजन का पहला मामला है।
देश के 45 से ज्यादा राज्यों में फ्लू का स्तर "उच्च" या "बहुत उच्च" है। आपातकालीन कक्षों में फ्लू के मरीजों की संख्या बहुत अधिक हो गई है। यह स्थिति 2009 में स्वाइन फ्लू महामारी के चरम के बाद अब तक की सबसे गंभीर बताई जा रही है। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, तेजी से फैलती सांस संबंधी बीमारियों के कारण कई स्कूलों को कक्षाएं बंद करनी पड़ी हैं या ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करनी पड़ी है।
फ्लू के अलावा, अमेरिका में नोरोवायरस, कोविड-19 और आरएसवी वायरस भी फैल रहे हैं, जिसे "क्वाड-डेमिक" कहा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मौसमी फ्लू एक संक्रामक श्वसन रोग है, जो इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है। यह दुनिया भर में आम है और अधिकतर लोग बिना इलाज के ठीक हो जाते हैं।
फ्लू खांसने या छींकने से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। इससे बचाव के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय है। फ्लू के लक्षणों में अचानक तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और कमजोरी शामिल हैं। इलाज में मुख्य रूप से लक्षणों से राहत देने पर ध्यान दिया जाता है। मरीज को पर्याप्त आराम करना चाहिए और ज्यादा पानी पीना चाहिए। आमतौर पर लोग एक हफ्ते में ठीक हो जाते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में या जोखिम वाले लोगों को चिकित्सा सहायता की जरूरत हो सकती है।
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कनाडा को अमेरिका में मिलाने की ट्रंप की धमकी वास्तविक : ट्रूडो

ओटावा। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो कहना है कि कनाडा को अमेरिका में मिलाने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी 'वास्तविक' है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने शुक्रवार को टोरंटो में कनाडा-अमेरिका आर्थिक शिखर सम्मेलन में व्यापार जगत के नेताओं से यह बात कही।
ट्रूडो ने कहा कि ट्रंप की धमकी कनाडा के महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच से प्रेरित हो सकती है। रिपोर्ट में कनाडाई पीएम के हवाले से कहा गया, "अमेरिकी राष्ट्रपति के मन में यह बात है कि ऐसा करने का सबसे आसान तरीका हमारे देश को अपने में समाहित करना है और यह एक वास्तविक बात है।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि ट्रंप इसलिए आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि अमेरिका को कनाडा के महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों से लाभ मिल सकता है। बता दें ट्रंप प्रशासन ने पिछले सप्ताह कनाडा से आयात पर टैरिफ लगाने की घोषणा की। इससे जवाब कनाडा ने 155 बिलियन कनाडाई डॉलर (107 बिलियन डॉलर) मूल्य के अमेरिकी सामानों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाकर दिया।
ट्रंप ने कहा कि अगर कनाडा भारी टैरिफ से बचना चाहता है तो वह अमेरिका का 51वां राज्य बन सकता है। हालांकि इसके बाद दोनों देशों ने प्रस्तावित टैरिफ को कम से कम 30 दिनों के लिए रोक दिया।
ट्रूडो की तरफ से कनाडा की सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताने के बाद, ट्रंप ने कम से कम एक महीने के लिए प्रस्तावित टैरिफ पर रोक लगाने की घोषणा की।
ट्रंप के साथ बातचीत के बाद ट्रूडो ने कहा कि कनाडा अपनी पूर्व घोषित 1.3 बिलियन डॉलर के बॉर्डर प्लान को लागू करेगा। उन्होंने इसके साथ ही एक 'फेंटेनल जार' की नियुक्ति करने और ड्रग कार्टेल को आतंकवादियों की सूची में शामिल करने की प्रतिबद्धता भी जताई।
ट्रंप पिछले काफी समय से कनाडा को लेकर आक्रामक रवैया अपना रहे हैं। उन्होंने कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कही है। इतना ही नहीं वह कई मौकों पर वह जस्टिन ट्रूडो को 'महान कनाडा राज्य का गर्वनर' बोल चुके हैं।
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एयर बुसान विमान में आग लगने के मामले में पुलिस ने गिमहे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर छापा मारा

बुसान। दक्षिण कोरियाई पुलिस ने पिछले सप्ताह एयर बुसान विमान में लगी आग से संबंधित साक्ष्य जुटाने के लिए शुक्रवार को गिमहे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर छापा मारा।बुसान मेट्रोपॉलिटन पुलिस एजेंसी ने कहा कि जांचकर्ताओं का लक्ष्य 28 जनवरी को विमान में आग लगने के समय के आसपास के निगरानी कैमरे के फुटेज को सुरक्षित करना था, जो सियोल से लगभग 320 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में बुसान में हवाई अड्डे से उड़ान भरने से कुछ समय पहले था।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "बड़ी मात्रा में दस्तावेज (हवाई अड्डे से) प्राप्त करने में ही कई दिन लग जाएंगे," उन्होंने कहा कि सामग्री का विश्लेषण करने में और भी अधिक समय लगेगा। पुलिस ने गुरुवार को एयर बुसान के मुख्यालय पर छापा मारा और उड़ान संचालन डेटा के साथ-साथ यात्रियों की सूची भी हासिल की। हांगकांग जा रहे एयर बुसान विमान में 176 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे और सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया, हालांकि सात को मामूली चोटें आईं।
योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, परिवहन मंत्रालय ने नागरिक उड्डयन दुर्घटनाओं की तकनीकी जांच के प्रभारी एक फ्रांसीसी एजेंसी के साथ मिलकर इस सप्ताह की शुरुआत में आग के कारणों का पता लगाने के लिए एक संयुक्त जांच शुरू की।
29 दिसंबर को, दक्षिण कोरिया हाल के दिनों में अपने सबसे घातक विमानन आपदा से हिल गया था। थाईलैंड से मुआन जा रहा जेजू एयर बोइंग 737-800 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और रनवे के अंत में एक कंक्रीट बैरियर से टकराने के बाद एक बड़े आग के गोले में बदल गया। इस भयानक घटना में विमान में सवार 181 यात्रियों और चालक दल के 179 लोगों की जान चली गई।
जैसे-जैसे जांचकर्ता कारणों का पता लगा रहे हैं, परेशान करने वाले सबूत सामने आ रहे हैं: विमान के दोनों इंजनों में बत्तख का खून और पंख थे। हालांकि, दुर्घटना का सही कारण अभी भी अज्ञात है। इस बीच, विमानन अधिकारी एयरलाइन सुरक्षा में लिथियम-आयन बैटरी की बढ़ती भूमिका को लेकर चिंतित हैं। पावर बैंक, सेल फोन, लैपटॉप और ई-सिगरेट जैसे उपकरण अलार्म बजा रहे हैं।
यूएस फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने अकेले 2024 में लिथियम बैटरी से संबंधित आग, धुआं या अत्यधिक गर्मी से जुड़ी 78 घटनाओं को दर्ज किया - जो 2016 में दर्ज की गई संख्या से दोगुनी से भी अधिक है। इन घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति हवाई यात्रा सुरक्षा में सख्त नियमों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है। (आईएएनएस)
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PM मोदी सोमवार को पेरिस में एआई शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को पेरिस में एआई शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे। उल्लेखनीय है कि फ्रांस ने भारत को इस बैठक की सह-अध्यक्षता करने के लिए आमंत्रित किया था। इससे पहले लंदन और सियोल में शिखर सम्मेलन आयोजित किए गए थे। एक हफ़्ते तक चलने वाली इस बैठक में उद्योग जगत के बड़े नाम, स्टार्ट-अप और प्रमुख हितधारकों के साथ-साथ अमेरिका और चीन का प्रतिनिधित्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति और चीनी उप प्रधानमंत्री करेंगे।
यह प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस की छठी आधिकारिक यात्रा है। एआई सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करने के अलावा, पीएम मोदी 12 फ़रवरी को फ़्रांस सरकार द्वारा आयोजित वीवीआईपी रात्रिभोज में भी शामिल होंगे।
"शिखर सम्मेलन के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फाउंडेशन के लॉन्च होने की भी उम्मीद है, फ़्रांस के राष्ट्रपति ने इसे 'एक्शन समिट' कहा है। शिखर सम्मेलन का फोकस एआई गवर्नेंस और इसे समावेशी बनाने पर होगा, इस बैठक के पीछे राजनीतिक संदेश यह है कि सभी देशों को एआई क्रांति में शामिल होना चाहिए जो चुनौतीपूर्ण है। एक्शन समिट फ्रांस और भारत के बीच अभिसरण को प्रदर्शित करेगा और एक पुल का निर्माण करेगा, नवाचार हमारा नया मंत्र होगा, "राजनयिक सूत्रों ने कहा।
एआई शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करने के बाद, प्रधान मंत्री मोदी पेरिस में सीईओ फोरम में शीर्ष फ्रांसीसी कंपनियों के सीईओ से भी मिलेंगे, फ्रांस भारत में ग्यारहवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है। भारत में 800 से अधिक फ्रांसीसी कंपनियां काम कर रही हैं। राजनयिक सूत्रों ने कहा कि जिस तरह से फ्रांसीसी कंपनियों ने 'मेक इन इंडिया' का अनुपालन किया है और किसी और की तरह प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण किया है, कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है।
सूत्र ने कहा, "विश्वास का निर्माण हुआ है, हमारा संबंध सिर्फ रणनीतिक नहीं है बल्कि यह सार्वभौमिक है।" प्रधान मंत्री मोदी फ्रांसीसी शहर मार्सिले में फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रोन के साथ द्विपक्षीय चर्चा भी करेंगे। राजनयिक स्रोतों से पता चला है कि एयरोस्पेस, इंजन, पनडुब्बी और परमाणु रिएक्टरों पर बातचीत सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार, यात्रा के दौरान कुछ ठोस द्विपक्षीय समझौते और घोषणाएं की जाएंगी। भारत-फ्रांस द्विपक्षीय रोडमैप का भी अनावरण किया जा सकता है। प्रौद्योगिकी, नवाचार, साइबर, अंतरिक्ष, सुरक्षा, संप्रभुता के अलावा द्विपक्षीय बैठक में लोगों के बीच संपर्क पर भी ध्यान दिया जाएगा। फ्रांस के पास देश में अधिक से अधिक भारतीय छात्रों को आकर्षित करने की महत्वाकांक्षी योजना है। बैठक के दौरान वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होगी। (एएनआई)
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डोनाल्ड ट्रम्प ने इजरायल के खिलाफ जारी वारंट को ख़ारिज करने के आदेश पर किए हस्ताक्षर

वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें अमेरिका के करीबी सहयोगी इजरायल की जांच को लेकर अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
न तो अमेरिका और न ही इजरायल इस न्यायालय का सदस्य है और न ही इसे मान्यता देता है, जिसने अक्टूबर 2023 में इजरायल के खिलाफ हमास के हमले के बाद गाजा में अपनी सैन्य प्रतिक्रिया पर कथित युद्ध अपराधों के लिए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इजरायली सेना की प्रतिक्रिया के दौरान बच्चों सहित हजारों फिलिस्तीनी मारे गए हैं।
ट्रम्प द्वारा हस्ताक्षरित आदेश में ICC पर "अमेरिका और हमारे करीबी सहयोगी इज़राइल को निशाना बनाकर अवैध और निराधार कार्रवाई करने" और नेतन्याहू और उनके पूर्व रक्षा मंत्री योव गैलेंट के खिलाफ "निराधार गिरफ्तारी वारंट" जारी करके अपनी शक्ति का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है।
आदेश में कहा गया है कि "ICC का संयुक्त राज्य अमेरिका या इज़राइल पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है", साथ ही कहा गया है कि न्यायालय ने दोनों देशों के खिलाफ अपनी कार्रवाई से "खतरनाक मिसाल" कायम की है।
ट्रम्प की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब नेतन्याहू वाशिंगटन का दौरा कर रहे थे। उन्होंने और ट्रम्प ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में बातचीत की, और नेतन्याहू ने गुरुवार को कैपिटल हिल में सांसदों के साथ बैठक की।
आदेश में कहा गया है कि अमेरिका ICC के "उल्लंघनों" के लिए जिम्मेदार लोगों पर "ठोस और महत्वपूर्ण परिणाम" लगाएगा। कार्रवाई में संपत्ति और परिसंपत्तियों को अवरुद्ध करना और ICC अधिकारियों, कर्मचारियों और रिश्तेदारों को संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देना शामिल हो सकता है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि न्यायालय के अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने से उन अन्य संघर्ष क्षेत्रों में अमेरिकी हितों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जहां न्यायालय जांच कर रहा है। अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन के राष्ट्रीय सुरक्षा परियोजना के कर्मचारी वकील चार्ली हॉगल ने कहा, "दुनिया भर में मानवाधिकारों के हनन के शिकार लोग अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का रुख करते हैं, जब उनके पास जाने के लिए कोई और जगह नहीं होती है, और राष्ट्रपति ट्रम्प के कार्यकारी आदेश से उनके लिए न्याय पाना कठिन हो जाएगा।" "यह आदेश प्रथम संशोधन से संबंधित गंभीर चिंताओं को भी जन्म देता है, क्योंकि यह संयुक्त राज्य अमेरिका में लोगों को कहीं भी, किसी के द्वारा किए गए अत्याचारों की पहचान करने और जांच करने में न्यायालय की मदद करने के लिए कठोर दंड के जोखिम में डालता है।"
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अमेरिका से बात करना कोई बुद्धिमानी और सम्मान की बात नहीं : खामेनई

  • ईरान के सुप्रीम लीडर ने दिए अहम संकेत
तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनई ने शुक्रवार को एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत करना बुद्धिमानी, समझदारी या सम्मान की बात नहीं है। खामनेई का यह बयान ऐसे वक्त सामने आया है, जब हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौते के मुद्दे पर फिर से बात करने की इच्छा जाहिर की थी। हालांकि खामनेई का यह बयान उनके ही पूर्व के उस बयान के विपरीत है, जिसमें खामनेई ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार होने की बात कही थी। गौरतलब है कि अब भी खामनेई ने अमेरिका से बातचीत न करने का कोई सीधा आदेश जारी नहीं किया। 
बीते दिनों जब अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने जीत हासिल की तो ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए थे कि वे परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए ट्रंप के संदेश का इंतजार कर रहे हैं। अब अयातुल्ला खामेनेई ने चौंकाते हुए इसके विपरीत बयान दिया है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अधिकतर दबाव बनाने संबंधी एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस दौरान ट्रंप ने ये भी कहा कि वे चाहते हैं कि उन्हें इस आदेश का ईरान के खिलाफ इस्तेमाल न करना पड़े। उन्होंने ईरान के साथ बातचीत को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए थे। 
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई ने भी पूर्व में अमेरिका के साथ बातचीत की वकालत की थी और कहा था कि हमें बातचीत के लिए अपने दरवाजे खुले रखने चाहिए, लेकिन अब खामेनेई ने अमेरिका से बातचीत को सम्मान के खिलाफ बताया है। ईरान के स्टैंड में बदलाव ट्रंप के हालिया बयान से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल मंगलवार को ट्रंप ने इस्राइली पीएम के साथ बातचीत के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि अमेरिका को गाजा पर नियंत्रण मिलना चाहिए और अमेरिका गाजा में पुनर्निर्माण का काम करे। उन्होंने गाजा के विस्थापितों को गाजा के बाहर ही बसाने का सुझाव दिया था। 
अब ईरान के सुप्रीम लीडर ने ट्रंप के गाजा को लेकर दिए बयान पर बिना नाम लिए टिप्पणी करते हुए कहा कि 'अमेरिकी बैठकर दुनिया का नक्शा फिर से बना रहे हैं - लेकिन केवल कागज पर, क्योंकि इसका वास्तविकता में कोई आधार नहीं है। वे हमारे बारे में बयान देते हैं, राय व्यक्त करते हैं और धमकियां देते हैं। अगर वे हमें धमकाते हैं, तो हम भी उन्हें बदले में धमकाएंगे। अगर वे अपनी धमकियों पर अमल करते हैं, तो हम भी अपनी धमकियों पर अमल करेंगे। अगर वे हमारे देश की सुरक्षा का उल्लंघन करते हैं, तो हम भी उसी तरह जवाब देंगे।'
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UNGA अध्यक्ष फिलेमोन यांग ने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष फिलेमोन यांग ने गुरुवार को नई दिल्ली में राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। एक्स पर एक पोस्ट में, विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "दिन की शुरुआत बापू को श्रद्धांजलि देकर की। @UN_PGA श्री फिलेमोन यांग ने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।"
मंगलवार को भारत पहुंचे फिलेमोन यांग ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बैठक की। बुधवार को बैठक के दौरान, जयशंकर और यांग ने संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे पर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और क्षेत्रीय, वैश्विक और विकासात्मक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
एक्स पर एक पोस्ट में जयशंकर ने कहा, "आज दोपहर दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र के अध्यक्ष फिलेमोन यांग से मिलकर खुशी हुई। संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे पर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें सुधारित बहुपक्षवाद की आवश्यकता भी शामिल है। साथ ही क्षेत्रीय, वैश्विक और विकासात्मक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। संयुक्त राष्ट्र में उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन की सराहना करता हूँ।"
विदेश मंत्री एस जयशंकर के निमंत्रण पर यांग मंगलवार को भारत की चार दिवसीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे। अपनी यात्रा के दौरान वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यांग का गर्मजोशी से स्वागत किया। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, "श्री फिलेमोन यांग का भारत में गर्मजोशी से स्वागत है। संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ की अगुवाई में भारत-संयुक्त राष्ट्र जुड़ाव को बढ़ाने का अवसर।" यांग का बेंगलुरु जाने का भी कार्यक्रम है, जहाँ वे इंफोसिस और भारतीय विज्ञान संस्थान का दौरा करेंगे।
एक प्रेस विज्ञप्ति में विदेश मंत्रालय ने कहा, "नई दिल्ली के अलावा,
श्री यांग बेंगलुरु का दौरा करेंगे। पीजीए का इंफोसिस और भारतीय विज्ञान संस्थान का दौरा करने का कार्यक्रम है, जहां उन्हें स्थिरता, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारत के नवाचारों पर विशेषज्ञों के साथ बातचीत करने का अवसर मिलेगा।" फिलेमोन यांग ने 10 सितंबर को यूएनजीए अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया। विदेश मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उनकी अध्यक्षता में, संयुक्त राष्ट्र ने "भविष्य के लिए एक समझौता" को अपनाया, जो "बेहतर कल के लिए बहुपक्षीय समाधान" को साकार करने के लिए एक विजन दस्तावेज़ है। इससे पहले, यांग कैमरून के प्रधान मंत्री के रूप में कार्यरत थे। (एएनआई)
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा- अमेरिका गाजा पट्टी पर कब्ज़ा करेगा

अमेरिका। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गाजा पट्टी पर "कब्जा" करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए एक असाधारण प्रस्ताव रखा, क्योंकि उन्होंने हमास के साथ युद्धविराम पर महत्वपूर्ण वार्ता के लिए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मेजबानी की थी। ट्रम्प ने फिलिस्तीनियों से युद्ध-ग्रस्त क्षेत्र से मिस्र और जॉर्डन जैसे मध्य पूर्वी देशों में चले जाने के लिए अपने आह्वान को भी दोहराया, जबकि फिलिस्तीनियों और दोनों देशों ने उनके सुझाव को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया था। ट्रम्प ने नेतन्याहू के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "अमेरिका गाजा पट्टी पर कब्जा करेगा और हम इसके साथ काम भी करेंगे। हम इसे अपना लेंगे।" ट्रम्प ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका बिना फटे बमों से छुटकारा पा लेगा, "साइट को समतल करेगा" और नष्ट हो चुकी इमारतों को हटा देगा, और "एक ऐसा आर्थिक विकास करेगा जो क्षेत्र के लोगों के लिए असीमित संख्या में नौकरियों और आवास की आपूर्ति करेगा।"
लेकिन ट्रम्प ने यह संकेत दिया कि फिलिस्तीनी लोग वहां वापस नहीं लौटेंगे। उन्होंने कहा, "इसे उन लोगों द्वारा पुनर्निर्माण और कब्जे की प्रक्रिया से नहीं गुजरना चाहिए जो वास्तव में वहां खड़े थे और इसके लिए लड़े थे और वहां रहते थे और वहीं मर गए और वहां एक दयनीय जीवन जीया।" उन्होंने कहा कि गाजा के दो मिलियन निवासियों को इसके बजाय "मानवीय दिल वाले अन्य देशों में जाना चाहिए।" नेतन्याहू ने ट्रम्प की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे "इज़राइल के अब तक के सबसे महान मित्र हैं।" उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की गाजा योजना "इतिहास बदल सकती है" और "ध्यान देने योग्य" है। मिस्र और जॉर्डन ने गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने के ट्रम्प के सुझाव को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीनी दूत ने कहा कि विश्व नेताओं को फिलिस्तीनियों की इच्छाओं का "सम्मान" करना चाहिए। गाजा के लोगों ने भी ट्रम्प के विचार की निंदा की है। दक्षिणी शहर राफा के निवासी 34 वर्षीय हेटम अज़्ज़म ने कहा, "ट्रम्प को लगता है कि गाजा कचरे का ढेर है - बिल्कुल नहीं।" अमेरिकी राष्ट्रपति ने 15 महीने से अधिक समय तक चली लड़ाई और बमबारी के बाद इजरायल-हमास संघर्ष विराम के पहले छह सप्ताह के चरण को सुरक्षित करने का श्रेय लिया है, और उनसे उम्मीद की जा रही थी कि वे नेतन्याहू से अधिक स्थायी शांति के उद्देश्य से अगले चरण की ओर बढ़ने का आग्रह करेंगे। नेतन्याहू से पहले जब पूछा गया कि वे दूसरे चरण की ओर बढ़ने के बारे में कितने आशावादी हैं, तो उन्होंने कहा था कि "हम कोशिश करने जा रहे हैं"।
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भारत ने एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों की खरीद के लिए रूस के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए

रूस। भारत ने मंगलवार को एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों की खरीद के लिए रूस के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, यह एक ऐसा कदम है जो भारतीय नौसेना के पनडुब्बी बेड़े की लड़ाकू क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा। रक्षा मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में यह घोषणा की। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा गया, “रक्षा मंत्रालय ने आज नई दिल्ली में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों की खरीद के लिए रूस के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। ये मिसाइलें @indiannavy के पनडुब्बी बेड़े की लड़ाकू क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएंगी।”
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